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तो क्या महेंद्र भट्ट होंगे भाजपा के अगले प्रदेश अध्यक्ष, महेंद्र भट्ट की नड्डा से मुलाकात के बाद अटकलों का जोर
 

देहरादून। उत्तराखंड के राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया में बृहस्पतिवार को अचानक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने की अफवाह गरमा गईं। इससे भाजपा के कई पदाधिकारी भी हक्के-बक्के दिखाई दिए। दिल्ली में बुधवार को भाजपा के पूर्व विधायक महेंद्र भट्ट की पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात को भी प्रदेश संगठन में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना से जोड़कर देखा गया। हालांकि, भट्ट ने इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट करार दिया।

वर्तमान में प्रदेश भाजपा की कमान वरिष्ठ और अनुभवी नेता मदन कौशिक के हाथों में है। कौशिक हरिद्वार से पार्टी के विधायक भी हैं। विधानसभा चुनाव के बाद से कौशिक के स्थान पर गढ़वाल मंडल के किसी ब्राह्मण नेता को संगठन की कमान सौंपे जाने की चर्चाएं गरमाती रही हैं। पिछले कुछ समय से इन चर्चाओं का बाजार थम गया था लेकिन अब अचानक प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने की अफवाह तेज हो गई हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी भी इस अफवाह से हक्के-बक्के हैं। उनका मानना है कि संगठन के स्तर पर अभी संगठन में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई हलचल नहीं है। उनकी दिलचस्पी यह जानने में है कि प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने की अफवाह का सूत्रधार कौन है।
इस संबंध में पूछे जाने पर प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने संगठन में नेतृत्व परिवर्तन की किसी भी तरह की संभावना को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की है। पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ने भी इसे अफवाह करार दिया।

माना जा रहा है कि बुधवार को बदरीनाथ से रहे विधायक महेंद्र भट्ट की पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद इस तरह की चर्चाओं ने जोर पकड़ा। हालांकि, भट्ट का कहना है कि उन्होंने मुलाकात के लिए पूर्व में समय लिया था और यह पूरी तरह से सामान्य शिष्टाचार भेंट थी। मीडिया के हलकों में पार्टी के विधायक खजानदास के दिल्ली में होने के भी सियासी निहितार्थ टटोले गए, जबकि खजानदास का कहना है कि उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष से कोई मुलाकात नहीं हुई। अलबत्ता उन्होंने व्यक्तिगत कार्य से राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से जरूर भेंट की। बहरहाल, सियासी हलकों में बृहस्पतिवार को सुबह से लेकर शाम तक भाजपा की सियासत गरम रही। कयास लगाए गए कि जल्द प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है और कौशिक को संगठन के स्थान पर सरकार में जगह दी जा सकती है। हालांकि, शाम होते-होते पार्टी नेताओं की ओर से इन कयासबाजियों को अफवाह करार दिया गया।