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देहरादून में राज्य कर विभाग ने इंडस्ट्रीज और स्मार्ट सिटी के कॉन्ट्रेक्टर के चार ठिकानों पर मारा छापा, एक करोड़ की पकड़ी चोरी
 

देहरादून। राज्य कर विभाग ने देहरादून में डेढ़ करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी। हर्रावाला स्थित इंडस्ट्रीज और स्मार्ट सिटी के कॉन्ट्रेक्टर (ठेकेदार) ने फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल कर सरकार को चूना लगाया। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा दून की दो टीमों ने दोनों कारोबारियों के चार ठिकानों पर छापेमारी करते हुए मंगलवार को इसका खुलासा किया।

विशेष अनुसंधान शाखा के उपायुक्त यशपाल सिंह ने बताया कि पहला मामला हर्रावाला स्थित हैंडीक्राफ्ट और वुड का कांटेक्ट कार्य करने वाली फैक्ट्री का है। यहां जांच में पाया गया कि व्यापारी अपना पूरा टैक्स जमा नहीं कर रहे थे। आईटीसी का गलत तरीके से फायदा उठा रहे थे। फैक्ट्री परिसर से अभिलेख जब्त किए गए, जिनमें रिवर्स चार्ज की करदेयता भी छिपाने की बात सामने आई। लग्जरी कारों की खरीद, विदेश यात्रा और कई दूसरी सेवाओं पर अदा किए गए टैक्स का लाभ आईटीसी के रूप में नहीं मिलता है, लेकिन व्यापारी ने इसका लाभ उठाया। माल मंगाने और भेजने में यदि भाड़े पर ट्रांसपोर्टर टैक्स अदा नहीं कर रहा है, तब टैक्स अदा करने का दायित्व भाड़ा चुकाने वाले यानी माल भेजने या पाने वाले का होता है, जिसे ‘रिवर्स चार्ज पर कर अदायगी कहा जाता है। व्यापारी भाड़े पर रिवर्स चार्ज पर पूरा टैक्स अदा नहीं कर रहे थे। यहां करीब सवा करोड़ की गड़बड़ी पकड़ी गई। दूसरा मामला स्मार्ट सिटी और वर्ल्ड बैंक परियोजना के ठेकेदार का है। यह फर्म पाइप लाइन बिछाने का काम करती है। ठेकेदार के ठिकानों पर गलत आईटीसी लिए जाने और कम टैक्स अदा करने के प्रकरण में छापेमारी की गई। यहां करीब 25 से 30 लाख की गड़बड़ी पकड़ी गई।

रिटर्न की स्क्रूटनी से पता चलते ही की छापेमारी

दोनों ही मामले व्यापारियों के रिटर्न की स्क्रूटनी के बाद सामने आए थे, जिसके बाद छापेमारी की गई। उपायुक्त यशपाल सिंह ने बताया कि उचित टैक्स अदा नहीं करने वालों, खासकर ठेकेदारों पर कड़ी नजर है। जल्द ही इस प्रकार के और मामलों का खुलासा किया जाएगा। इस टीम में सहायक आयुक्त जयदीप सिंह रावत, राज्य कर अधिकारी सुधीर चंदोला, सुनील रावत, मोनिका पंत, राज्य कर निरीक्षक डॉ. संगीता बिजल्वाण शामिल थे।

खुद भरें पूरा टैक्स, वरना सख्त कार्रवाई होगी

राज्य कर विभाग के विशेष अनुसंधान शाखा उपायुक्त यशपाल सिंह ने बताया कि जीएसटी लगते समय जुलाई 2017 से अक्तूबर 2018 के शुरुआती 15 महीनों तक टीडीएस की व्यवस्था नहीं होने का ठेकेदारों ने अनुचित लाभ उठाया। संविदाकारों को हुए भुगतान की ट्रेजरी से सूचना जुटाते हुए इस प्रकार के मामलों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे संविदाकार स्वयं पूरा टैक्स जमा करा दें तो जुर्माने से बच सकते हैं, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी।