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राजीव गाँधी नवोदय स्कूल बंद करने से नाखुश पूर्व सीएम हरीश रावत, एक जून को विरेाध स्वरूप अपने आवास पर करेंगे उपवास
 

देहरादून। राजीव गाँधी नवोदय स्कूल बंद करने के फैसले पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने नाराजगी जाहिर की है। हरीश रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि यदि पूर्व पीएम राजीव गांधी के नाम से स्थापित स्कूलों केा बंद किया गय तो विरोध किया जाएगा। रावत ने सोमवार को सोशल मीडिया के जरिए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कांग्रेस की सरकार ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी की पहल पर राज्य में शिक्षा में सुधार के निरंतर प्रयास किये। जवाहर नवोदय स्कूल, राजीव नवोदय स्कूलों की तर्ज पर 2014-15 में राजीव गांधी अभिनव स्कूल भी शुरू किए गए। ये स्कूल उन क्षेत्रों में बनाए गए थे, जहां छात्रों की कमी से स्कूल बंद हो रहे थे। पढाई के इच्छुक छात्रों के सामने एक ही विकल्प रहता था या तो प्राइवेट स्कूल में जाएं। और यदि फीस नहीं दे सकते तो अपने घर बैठें।

कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हाई स्कूल और इंटर स्कूल के स्तर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए भी 475 मॉडल स्कूल भी विकसित किए। रावत ने कहा कि मॉडल स्कूलों का नाम भले ही सरकार बदल ले, लेकिन राजीव गाँधी अभिनव स्कूल और राजीव गाँधी नवोदय स्कूलों को बंद करना अस्वीकार्य है। रावत ने सवाल किया कि आाखिरकार भाजपा को देश में आधुनिक, दूर संचार व कंप्यूटर क्रांति के अग्रदूत, पंचायती व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा देने और 18 साल के नौजवान को भी वोट का अधिकार देने वाले राजीव गाँधी से इतनी नाराजगी क्यों हैं? बकौल रावत, ये दुष्प्रयास हैं और इसकी निंदा की जानी चाहिए।यदि सरकार ने अपने इस दुष्प्रयास को नही छोड़ा तो एक जून को विरेाध स्वरूप अपने आवास पर उपवास करूंगा। रावत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि सरकार के इस फैसले के विरोध मे अपने घर मे ही बैठकर उपवास करें। और गांधीवादी तरीके से अपने अपने लोकतांत्रिक विरोध को दर्ज करें।