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दिल्ली में कोहरे और ठंड के कारण कुछ उड़ाने हुई विलंबित, यात्रियों को झेलनी पड़ रही परेशानी

 

दिल्ली- एनसीआर। उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में चल रही शीतलहर के बीच दिल्ली के सफदरजंग में आज सुबह 6:10 बजे न्यूनतम तापमान 5.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पालम क्षेत्र में दृश्यता 100 मीटर दर्ज की गई। दिल्ली में स्मॉग की वजह से वायु गुणवत्ता 421 के समग्र एक्यूआई के साथ 'गंभीर' श्रेणी में है। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजधानी में कोहरे और ठंड के कारण कुछ उड़ानें (दिल्ली-शिमला, दिल्ली-काठमांडू, दिल्ली-चेन्नई, दिल्ली-जैसलमेर, दिल्ली-बरेली, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-वाराणसी, दिल्ली-श्रीनगर, दिल्ली-जयपुर, दिल्ली-गुवाहाटी) विलंबित हुईं। दिल्ली हवाईअड्डे पर करीब 45 उड़ानें देरी से चल रही हैं। सुबह 8 बजे तक किसी फ्लाइट के डायवर्जन की सूचना नहीं थी। इसके अलावा कोहरे के कारण उत्तर रेलवे क्षेत्र में 26 ट्रेनें देरी से चल रही हैं।

इससे पहले, मंगलवार को घने कोहरे ने रेल परिचालन व्यवस्था को पटरी से ही उतार दिया है। मंगलवार को 237 से अधिक ट्रेनें प्रभावित रहीं। इस वजह से कई ट्रेनें निरस्त करनी पड़ीं। राजधानी समेत 97 ट्रेन दो से आठ घंटे की देरी से चलीं। इस वजह से यात्रियों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ा। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड व कोहरे की वजह से रेल यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रेन लगातार देरी से संचालित हो रही है। इस वजह से ट्रेन ही नहीं स्टेशनों के प्लेटफार्म पर भी यात्री अपनी-अपनी ट्रेन के आने की बांट जोहते जोहते थक जा रहे है। वहीं सुबह पहुंचने वाली ट्रेन शाम को पहुंचने की वजह से कामकाजी लोगों को एक दिन अधिक होटल में गुजारने की मजबूरी है।

देरी से चलने वाली ट्रेनों में मुख्य रूप से गोरखधाम एक्सप्रेस 10 घंटे, आंध्र प्रदेश एक्सप्रेस 6 घंटे की अधिक देरी से पहुंची। वहीं, मालदा टाऊन-दिल्ली एक्सप्रेस 7 घंटे, कैफियत एक्सप्रेस 6 घंटे, ब्रह्मपुत्र 5 घंटे, रीवा 6 घंटे, पूर्वा 3 घंटे, प्रयागराज-नई दिल्ली 2 घंटे, रक्सौल-आनंद विहार 3 घंटे, पदमावत 2 घंटे, मालवा सुपरफास्ट 2:20 घंटे, प्रयागराज हमसफर 3 घंटे, दरभंगा-नई दिल्ली क्लोन 3 घंटे, पुरुषोत्तम 3 घंटे की देरी से अपने गंतव्य स्टेशनों पर पहुंचीं। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने समीक्षा बैठक में कहा कि सर्दियों के दौरान घने कोहरे के कारण रेल परिचालन में चुनौतियां बढ़ जाती हैं । उन्होंने सभी मंडलों को सिग्नल प्रणाली के ठीक तरह से काम करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।