राज्यमंत्री रेखा आर्य ने हंसी के सामने रखा सरकारी नौकरी का प्रस्ताव, इस महिला की दर्दभरी कहानी आपको रुला देगी

हरिद्वार। उत्तराखंड के कुमाऊं विश्वविद्यालय की होनहार और डबल एमए करने वाली अल्मोड़ा की हंसी के हरिद्वार में भिक्षा मांगने की खबर मीडिया में आने के बाद मंगलवार को राज्य मंत्री रेखा आर्य उनसे मिलने पहुंचीं। इस दौरान मंत्री रेखा आर्य ने हंसी को समाज कल्याण विभाग में नौकरी देने की बात कही। कहा कि नौकरी से पहले हंसी की काउंसिलिंग की जाएगी। जिस पर हंसी ने मंत्री से इस बारे में सोचने के लिए एक दिन का समय मांगा। इस दौरान हंसी ने कहा कि वह अल्मोड़ा या देहरादून नहीं जाना चाहती हैं। वह हरिद्वार में रहना चाहती हैं। फिलहाल हंसी के रहने की व्यवस्था की जाएगी।

दूसरी तरफ कई लोग हंसी प्रहरी और उनके बेटे परीक्षित कुमार के चेहरे पर हंसी लाने के लिए सामने आए। कुछ लोगों ने तत्काल आर्थिक मदद भी मुहैया कराई। एसडीएम ने भी हंसी प्रहरी से मिलकर हालचाल जाना और तीन दिन के अंदर आवास दिलाने का आश्वासन दिया।

हंसी की दर्दभरी कहानी आपको रुला देगी
राज्यमंत्री रेखा आर्य हंसी प्रहरी से मुलाकात के लिए हरिद्वार पहुंची। उन्होंने महिला का हालचाल जाना। बताया जा रहा है कि मंत्री रेखा आर्य हंसी प्रहरी के लिए हरिद्वार बाल विकास कार्यालय में नौकरी और स्थाई निवास का प्रस्ताव लेकर आई हैं। बता देें हंसी वो महिला है, जो अपने छात्र जीवन में न केवल कुशल वक्ता रही, बल्कि छात्र राजनीति में सक्रिय रहते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा परिसर में छात्रसंघ उपाध्यक्ष भी चुनी गई। पर इसे नियति का खेल ही कहेंगे कि अंग्रेजी और राजनीति शास्त्र में एमए डिग्रीधारी ये महिला आज हरिद्वार की सड़कों पर भीख मांग अपना और बच्चे का गुजारा करने को मजबूर हैं। पर हौसले अब भी मजबूत हैं। वो अपने बच्चे को पढ़ा भी रही हैं और अफसर बनाने के सपने बुन रही हैं।

अल्मोड़ा जिले के हवालबाग ब्लॉक स्थित ग्राम रणखिला गांव की रहने वाली इस महिला का नाम है हंसी प्रहरी। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हंसी की इंटर तक की शिक्षा गांव में ही हुई और फिर उसने कुमाऊं विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा परिसर में प्रवेश ले लिया। पढ़ाई के साथ-साथ वह विवि की तमाम शैक्षणिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थी। बकौल हंसी, ‘वर्ष 2000 में मैं छात्रसंघ में उपाध्यक्ष चुनी गई और फिर विवि की ही सेंट्रल लाइब्रेरी में चार साल तक नौकरी की।’

सड़क किनारे पढ़ा रही थी बच्चे को
हरिद्वार में हंसी की ओर मीडिया का ध्यान रविवार को तब गया, जब वह सड़क किनारे अपने छह साल के बेटे को पढ़ा रही थी। उसकी फर्राटेदार अंग्रेजी हर राहगुजर को हतप्रभ कर देने वाली थी। हंसी बताती है कि ससुराल की कलह से परेशान होकर वर्ष 2008 में वह लखनऊ से हरिद्वार चली आई। यहां शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण वह नौकरी नहीं कर पाई और रेलवे स्टेशन, बस अड्डा आदि स्थानों पर भीख मांगने लगी। इस हाल में भी हंसी की हिम्मत डिगी नहीं है, वह बेटे को पढ़ा रही है और चाहती है कि वह प्रशासनिक अधिकारी बने।

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