मनमोहन सिंह को राज्य सभा में भेजने के लिए हर रास्ता अपनाने को तैयार कांग्रेस !

मनमोहन सिंह राजनीति के लिए बने नहीं थे। ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई पूरी करके अपने करियर की शुरुआत उन्होंने टीचर के तौर पर की लेकिन उनकी नियति उन्हे योजना आयोग और रिजर्व बैंक और यूपीएससी के रास्ते संसद तक लाई। इस तरह के चुनिंदा व्यक्तित्वों को चुनावी मैदान में उतारने का दांव खेलने के बजाए हर राजनीतिक दल उन्हें राज्य सभा के रास्ते संसद में लाते हैं। मनमोहन सिंह के साथ भी ऐसा ही हुआ था पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव उन्हें असम से राज्य सभा में लेकर आए थे, और इस तरह वे 28 साल से इस राज्य का राज्य सभा में प्रतिनिधित्व करते रहे और 15 जून 2019 को उनका यह कार्यकाल खत्म हो चुका है। बता दें कि इन तीन दशकों में पहली बार मनमोहन सिंह संसद से बाहर होंगे और वो भी ठीक बजट सत्र से पहले।

बता दें कि जून 2016 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को असम में हार का सामना करना पड़ा था. 126 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस की गिनती 78 से सिमटकर महज 26 पर आ गई. इस तरह मनमोहन सिंह के असम से एक दफा और राज्य सभा जाने की आशाएं धूमिल हो गईं. बीजेपी ने मनमोहन सिंह की जगह असम से कामख्या प्रसाद को राज्य सभा भेजा है।

राज्य सभा की विशेषता यह है कि राज्य सभा कभी भंग नहीं होती इसमें हर सदस्य को छह साल के लिए चुना जाता है। और हर दो साल में इसके एक-तिहाई सदस्यों का निर्वाचन होता है। इसी तरह 2014 में राज्य सभा के चुने गए सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2020 में खत्म होगा ऐसे में कांग्रेस को मनमोहन सिंह को फिर से राज्य सभा भेजने के लिए 2020 तक का इंतजार करना होगा। लेकिन कांग्रेस. उससे पहले मनमोहन सिंह को राज्य सभा भेजने के लिए विचार कर रही है। बता दें कि यह रास्ता थोड़ा पेचीदा है क्योंकि यह रास्ता गुजरात से होकर जाता है।
2017 में विधानसभा चुनाव से कुछ ही समय पहले गुजरात में राज्य सभा के चुनाव हुए थे जिसमें अमित शाह और स्मृति ईरानी को बीजेपी ने और कांग्रेस की तरफ से अहमद पटेल उतरे थे। उस समय 182 सीटों वाली गुजरात विधान सभा में बीजेपी के पास 115 विधायक और कांग्रेस के पास 61 विधायक थें। इसके हिसाब से 3 में एक सीट कांग्रेस के खाते में जानी थी, और अहमद पटेल घिसटते हुये ही सही लेकिन राज्य सभा की रेस जितने में कामयाब रहे थे। बता दें कि इस लड़ाई में बीजेपी ने अभी भी मैदान नहीं छोड़ा है, पटेल के खिलाफ चुनाव लड़े बीजेपी उम्मीदवार बलवंत सिंह राजपूत इस चुनाव को लेकर हाईकोर्ट चले गए थे और कुछ समय बाद यानि 20 जून के दिन इस मामले की सुनवाई होनी है।

बता दें कि 2019 लोक सभा में अमित शाह गांधी नगर और स्मृति ईरानी अमेठी से लोक सभा पहुंच चुके हैं, और कोई आदमी संसद के एक ही सदन का सदस्य हो सकता है। अब दोनों के गुजरात से राज्यसभा की अपनी सांसदी छोड़ने से अब यह सीटें खाली हैं। ऐसे में अगर राज्य सभा की दोनों खाली सीटों पर चुनाव होते हैं तो एक सीट तो कांग्रेस के खाते में जानी तय है। लेकिन इसमें भी एक पेंच यह फंसा है कि कांग्रेस को डर है अगर चुनाव आयोग इन दो राज्य सभा सीटों का चुनाव अलग-अलग दिन न करा दें और यदि ऐसा होता है तो दोनों सीटें बीजेपी के खाते में चली जाएंगी इस आशंका में घिरे कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी कहते हैं कि –

“क्योंकि दोनों सीट एक साथ खाली हुई थीं इसलिये दोनों सीटों का चुनाव एक साथ होना चाहिए अगर ऐसा नहीं होता तो यह हमारे संवैधानिक मूल्यों का मखौल उड़ाने जैसा होगा। अतीत में भी हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और दूसरे कई राज्यों में इस परम्परा को तोड़ा गया है।”

Image result for manmohan singh in rajya sabhaइधर मनमोहन सिंह की उम्र 87 वर्ष होने के कारण कई राजनीतिक विश्लेषक इसे मनमोहन सिंह के राजनीति से संन्यास लेने का सही मौका मानते हैं। लेकिन इसके साथ ही यह चर्चा भी चल रही है कि कांग्रेस उन्हें अभी अलविदा नहीं करना चाहती पार्टी उन्हें राजनीति में बनाए रखना चाहती है और इसके लिये मनमोहन सिंह को गुजरात के रास्ते फिर से राज्य सभा लाने के लिए जोर लगा रही है। अगर उन्हें यह कामयाबी नहीं मिलती है तो 2020 अप्रैल में मध्य प्रदेश और राजस्थान के 3-3 और छत्तीसगढ़ के 2 राज्य सांसदों का कार्यकाल खत्म होने को हैं और इसके अलावा गुजरात के साथ ही कर्नाटक के 4-4 राज्य सभा सांसदों का कार्यकाल भी अप्रैल 2020 में खत्म होने को है। इसी तरह कांग्रेस का यह प्रयास हैं कि अगर मनमोहन सिंह गुजरात से राज्य सभा नहीं पहुंचते हैं तो उन्हें इन राज्यों के रास्ते भी राज्य सभा भेजा जा सकता है।

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