मिसाल बने टिहरी के दो प्रवासी युवक… यूट्यूब से सीखा LED बल्ब बनाना, अब दे रहे बेरोज़गारों को काम

टिहरी। लॉकडाउन ने लोगों की ज़िंदगी बदल दी है। नौकरी जाने से, काम-धंधा ठप होने से बहुत से लोग निराश-हताश होने लगे हैं तो ऐसे लोग हैं जो संघर्ष और जीवटता की मिसाल बन रहे हैं। टिहरी के दो युवकों ने आत्मनिर्भरता का ऐसा ही उदाहरण पेश किया है। 4 महीने की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार उन्हें सफलता मिल ही गई है। होटल इंडस्ट्री में काम करने वाले विकास और धीरेंद्र आज एलईडी बल्ब बना रहे हैं। ख़ास बात यह है कि उन्होंने इसकी ट्रेनिंग किसी संस्थान में नहीं बल्कि यूट्यूब से ली है।

10-15 हज़ार के बल्ब बेचे 

टिहरी जिले के नकोट गांव के विकास इंदौर में तो धीरेन्द्र हरिद्वार में होटल इंडस्ट्री में काम करते थे। लॉकडाउन के चलते उन्हें घर वापस लौटना पड़ा। उन्होंने स्वरोज़गार के लिए कई प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने इंटरनेट का सहारा लिया और एलईडी बल्ब बनाना यूट्यूब पर सीखा। 4 महीने की मेहनत के बाद आज वह सफल हुए हैं और एलईडी बल्ब बना रहे है।

अपने संसाधनों से उन्होंने एक छोटे से कमरे में 70 हजार रुपये से कुछ इक्यूपमेंट्स और रॉ मेटिरियल मंगाया और एलईडी बल्ब बनाए। अभी तक ये लोग करीब 10 से 15 हजार के एलईडी बल्ब बनाकर बेच चुके हैं।

डिप्रेशन में आ गए थे 

विकास बिष्ट का कहना है कि होटल की नौकरी छूटने के बाद उनके सामने सबसे बड़ा संकट आजीविका चलाना था, जिसे लेकर वे चिन्तित रहते थे। धीरेन्द्र का भी कहना है कि नौकरी छूटने से वह काफी डिप्रेशन में आ गए। दोनों ने कई स्वरोज़गार योजनाओं का फ़ायदा लेने की कोशिश की लेकिन कहीं सफलता नहीं मिली।

दोनों दोस्त कहते हैं कि हर कोई खेती और पशुपालन नहीं कर सकता है। इसलिए उन्होंने इस सबसे कुछ अलग करने की सोची। यूट्यूब पर एलईडी बल्ब बनाने सीखना शुरु किया और करीब 4 महीने तक वे एक्सपेरिमेंट करते रहे। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें सफलता मिली।

चंबा, गजा मार्केट में ऑर्डर लेने वे खुद जाते हैं और माल सप्लाई करते है। अभी तक दोनों 10 से 15 हज़ार का बिजनेस कर चुके है और उन्हें लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। धीरे धीरे काम जमने के साथ अब उन्होंने आटा चक्की भी लगा ली है।

अब दे रहे नौकरी 

अब उनके गांव के लड़के भी उनसे जुड़ने लगे हैं। कोई एलईडी बल्ब बनाना सीख रहा है तो कोई चक्की में काम कर रहा है। उनके साथ काम करने वाले गांव के युवकों का भी मानना है कि अगर शासन, प्रशासन और मदद करे तो वे इस काम को बड़े स्तर पर भी कर सकते हैं।

नकोट गांव के अभिषेक ने बताया कि 12वीं के बाद वह भी घर पर ही खाली थे। फिर उन्होंने इनके साथ मिलकर एलईडी बल्ब बनाना सीखा और आज वह इस बिजनेस में उनकी हेल्प करने के साथ ही पैसा भी कमा रहे है। अब इन्होंने आटा चक्की भी खोल दी है जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है।

स्थानीय युवक मानवेन्द्र बिष्ट का कहना है कि अगर सरकार उनकी मदद करे तो वह इस बिज़नेस को बड़े स्तर पर कर सकते है और अन्य बेरोजगार युवाओं को भी रोज़गार दे सकते हैं। सरकार को ज़रूरत है तो ऐसे युवकों की मदद और प्रोत्साहन देने  की ताकि इनकी तरह अन्य प्रवासी भी अपनी काबलियत के दम पर आत्मनिर्भर बन सकें और स्वरोज़गार से जुड़कर अपनी आजीविका चला सकें।

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