कोलकाता: जहां आज भी संस्कृति मौजूद है

कोलकाता के जनजीवन में सामान्य लोगों के अपने अपने में तल्लीन होने के बावजूद लोगों के मन में कोमल भावनायें, सभ्यता व संस्कृति आज भी देखने को मिलती हैं। वहां की संस्कृति मुझे आज भी अपनी ओर खींचती है। वहां स्त्रिायों के प्रति जो सम्मान आज भी व्याप्त है वह वाकई तारीफ के काबिल है। घंटा ध्वनि व शंख-ध्वनि आज भी कदम कदम पर सुनाई देती हैं।
शक्ति की पूजा वहां सबसे ज्यादा होती है। देवी पूजन में बंगाल से आगे शायद कोई शहर हो। माना आज बढ़ती औद्योगिक दुनियां में आधुनिकता सबको अपना ग्रास बनाती चल रही है, अपना असर वह हर क्षेत्रा कस्बे में छोड़ रही है तो बंगाल क्या है परन्तु और जगहों से बंगाल फिर भी अलग है।
बंगाली भाषा के प्रेमी होते हैं। अपनी बंगला भाषा के प्रति इनमें अटूट प्रेम देखा जा सकता हैं। भाषा, विशेषतः मृदु भाषा इनकी कमजोरी है। भाषा का अच्छा ज्ञान भी होना एक खास विशेषता है।
आज भी कोलकाता में अद्भुत इमारतें हैं। अंग्रेजों के समय की राइटर्स बिल्डिंग आज भी मौजूद है। उस पुरानी इमारत में आज भी काम-काज होता है। फोर्ट विलियम, विक्टोरिया टर्मिनल इत्यादि अंग्रेजों के समय की इमारतें मौजूद हैं। अनेक पुराने धार्मिक स्थान आज भी दर्शनीय हैं। कालीघाट कोलकाता का सर्वश्रेष्ठ मंदिर है। रामकृष्ण मिशन, दक्षिणेेश्वर मंदिर, बेलूर मठ, ताड़केश्वर, भैरव मंदिर और हिन्दुओं का सबसे महत्त्वपूर्ण गंगा सागर देवस्थान यहां मौजूद हैं। करोड़ों की संख्या में हिन्दू हर साल स्नान-ध्यान करके अपने को कृतार्थ करते हैं।
बंगाल में एक तरफ संस्कृति पनप रही है तो दूसरी ओर खाने-पीने के स्वादिष्ट पकवान भी मौजूद हैं। के.सी. दास का रसगुल्ला व सन्देश तो प्रसिद्ध हैं ही, फुटपाथों पर भी अनेक प्रकार के चटपटे व्यंजन मौजूद हैं जैसे झालमुड़ी, फुचके, आलूचाट, पापड़ी, चुरमुट आदि। ये सब वहां के काफी स्वादिष्ट चटपटे व्यंजन हैं। मैं कोलकत्ता से काफी दूर हूँ पर वहां के सैर-सपाटे, चैड़ी सड़कें, रविंद्र संगीत, ईडन-गार्डन आदि सब कुछ याद आते हैं।

-अर्चना मिश्रा-

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