‘बुद्धम शरणम गच्छामि’ का ज्ञान दे रहा जापानी ‘यंत्रशास्त्री’

मुंबई। ईश्वर की आराधना के लिए जानेवाले कर्म कांड युक्त पूजा-अर्चना की विधि में सिद्धहस्त होने के बाद ही आचार्य और शास्त्री आदि की उपाधि मिलती है। इसमें निपुण होने के बाद पंडित-पुजारी मंदिर में पूजा-अर्चना कराने के पात्र माने जाते हैं। इसके अंतर्गत संस्कृत आदि का संपूर्ण ज्ञान व कर्मकांड सिद्धांत को समझना होता है।

लेकिन अब आधुनिक युग है इसलिए कल किसी मंदिर में कोई रोबोट पूजा कराता मिल जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। ऐसे यंत्र शास्त्री’ अब जापान में आ चुके हैं और ये ‘भंते’ अभी ‘बुद्धम् शरणम् गच्छामि’ का ज्ञान बांट रहे हैं।

जापान के एक बौद्ध मंदिर में रोबोट पुजारी है, जो लोगों को करुणा की शिक्षा देता है। यह रोबोट मंदिर में आनेवाले श्रद्धालुओं को प्यार, करुणा के साथ गुस्सा, क्रोध अहंकार जैसी बुराइयों से दूर रहने की भी शिक्षा देता है। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि बदलते वक्त के साथ यह रोबोट खुद को अपडेट करता रहेगा।

बता दें कि इस रोबोट को जापान के एक ४०० साल पुराने बौद्ध मंदिर में पुजारी के तौर पर नियुक्त किया गया है। बौद्ध मंदिर में रोबोट की नियुक्ति पर विवाद भी हुआ था लेकिन इसके बाद भी एंड्रॉयड वैहृनन को क्योटो के कोदाइजी मंदिर में रखा गया है। रोबोट मंदिर में आनेवाले श्रद्धालुओं को दया और करुणा का संदेश देता है। मंदिर में मौजूद अन्य पुजारी रोबोट की सहायता करते हैं और उन्हें यकीन है कि कृत्रिम इंटेलिजेंस के जरिए आनेवाले दिनों में रोबोट और अधिक बुद्धिमान नजर आएगा।

इसके बारे में मंदिर के एक पुजारी थेनसे गोटो ने बताया कि ‘यह रोबोट कभी भी नहीं मरेगा और समय के साथ यह अपने में कुछ सुधार करते जाएगा और खुद को बदलते वक्त के साथ प्रासंगिक बनाएगा यही इस रोबोट की खासियत है। बौद्ध धर्म के अनुसार यह लगातार अपने ज्ञान में वृद्धि करता रहेगा और वक्त के साथ अपना ज्ञान भी बढ़ाता जाएगा।

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