विक्रम लेंडर से संपर्क करने के लिए ISRO की समय सीमा निर्धारित

ISRO, एजेंसी | ISRO के अनुसार चंद्रयान 2 से संपर्क तो टूट गया था लेकिन चंद्रयान का विक्रम लैंडर अभी चांद की सतह पर मौजूद है, लेकिन विक्रम लैंडर से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। चांद की कक्षा में ढूंढ रहे ऑर्बिटर की मदद से ऐसा करने की लगातार कोशिश की जा रही है लेकिन सफ़लता कुछ नहीं है। इसके अलावा ये भी जानना ज़रूरी है कि विक्रम लैंडर से संपर्क कर पाने का समय बहुत कम है। सरकार द्वारा लगभग दो हफ़्तों की ही समय दिया गया है। इस बीच अगर संपर्क नहीं हो पाता है तो ये मान लेना चाहिए कि इसरो विक्रम लैंडर को हमेशा के लिए खो देगा।

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दरअसल चांद पर दिन और रात के बीच के समय में बहुत बड़ा फासला है। चांद पर 14 दिन की सुबह होती है, और इसके बाद 14 दिन की रात होती है। जिस समय चंद्रयान चांद पर पहुंचा, उस समय चांद की सुबह चल रही थी। इस 14 दिन की सुबह के बीच ही विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर को अपना सारा काम पूरा करना था। चांद की रात के बारे में बात करें तो ये रातें बहुत ठंडी होती हैं। माइनस 200 डिग्री तक तापमान चला जाता है।  मतलब जिस टेम्प्रेचर पर पानी बर्फ में बदलता है, उससे भी 200 डिग्री नीचे, और विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर गिरा है। वहां तो तापमान की कमी और भी ज़्यादा होगी और चंद्रयान को इस तरीके से बनाया गया है कि वो दिन के समय ही काम कर सकता है। रात के ठंडे तापमान में नहीं। अब विक्रम लैंडर चांद की सतह से जाकर टकरा गया है। वहां उसकी लैंडिंग सही तरीके से नहीं हो सकी है। इसरो ने बताया है कि लैंडर चांद की ज़मीन पर टेढ़ा पड़ा हुआ है। अगर लैंडर का एंटीना सही दिशा में हुआ तो ही ऑर्बिटर से उसका संपर्क हो सकेगा। अगर लैंडर का एंटीना चांद की ज़मीन में धंसा होगा, या टूट गया होगा, या किसी पत्थर के नीचे दबा होगा, तो ऑर्बिटर से उसका कोई संपर्क नहीं साधा जा सकेगा । संपर्क की कोशिश के लिए महज़ 14 दिनका समय है ।  उसके बाद ऑर्बिटर ही रहेगा, कह सकते हैं कि लैंडर और रोवर दोनों बेकार ।

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