जानिये जीवन में उदासी और खालीपन के बढ़ते राज से बचने के उपाय

न्यूज़ डेस्क |

हमारे अपने भीतर आगे-पीछे की बातों के गुबार कम नहीं होते। बाहर का प्रदूषण मन के उस मौसम को और बिगाड़ देता है। उदासी और खालीपन का धुआं बढ़ता रहता है। कुछ करने का मन नहीं होता। पर चैन की सांस लेनी है तो कुछ तो करना होगा ही। हवा में खुशियां भी छुपी होती हैं। प्रदूषण केवल सेहत पर असर नहीं डालता, हमारी खुशियों को भी निशाना बनाता है। गंदी और जहरीली हवा फेफड़े के रास्ते, दिमाग में पहुंचकर खलबली मचाने लगती है। बिगड़े मौसम का असर हमारे मूड व बर्ताव पर भी पड़ने लगता है। शोध कहते हैं कि हमें प्रदूषण की भावनात्मक कीमत चुकानी पड़ती है। उदासी और निराशा की परतें दिमाग पर छाई रहती हैं, जो हमारे फैसलों और काम करने के तरीकों पर असर डाल सकती हैं। चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ने लगता है। यह तो हुई बाहरी प्रदूषण के असर की बात। हमारे दिमाग में आगे-पीछे के गुबार भी कम नहीं होते। लगातार कई तरह की उठापठक चलती रहती है। कई बार गड़बड़ी अपने विचारों में होती है तो कई बार दूसरों से जुड़ी बातों का कचरा दिमाग को दूषित करता रहता है। कारण जो हो, पर भीतर के प्रदूषण से जितना जल्दी हो, निजात पा ही लेना चाहिए।

आइये जानते हैं इसके कुछ उपाय –  

  • उतार दें निराशा और उदासीनता के पर्दे-

कई दिनों का खालीपन एकदम से नहीं भरता। कई बार खुद को खुश रखना टेढ़ी खीर बन जाता है। फिर खुशी पाने का कोई एक तय तरीका है भी नहीं। खुद को अच्छा एहसास कराने के लिए कई कोशिशें करनी पड़ती हैं। संतों से लेकर आधुनिक कोच यही कहते हैं कि खुद को खुश रखने की पहली जिम्मेदारी हमारी अपनी है और हमसे बेहतर कोई हमें खुश रख भी नहीं सकता।

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  • नई कहानी सोचें-

किसी विचार से जुड़ा डर, गुस्सा या निराशा का भाव उस कहानी का नतीजा है, जो आप खुद को सुनाते हैं। हो सकता है कि कोई काम जबरदस्ती करना पड़ रहा हो या बात निराश करने वाली ही हो। पर, उदास बने रहकर भी क्या हासिल कर रहे हैं?बेहतर है कि कुछ समय के लिए खुद को नई कहानी सुनाएं। बातों के सिलसिले को नए ढंग से सोचें। कहानी को किसी सुखद अंत तक ले जाने की कोशिश करें।

  • बुरे विचार पर अटकें नहीं-

दिन में साठ हजार से ज्यादा विचार दिमाग में आते हैं। ज्यादातर भीतर के डर और बेचैनी से जुड़े होते हैं। जितना उन्हें पकड़े रहते हैं, उन पर बातें करते हैं, उतना दुखी हो जाते हैं। मान लीजिए कि किसी के साथ बुरा अनुभव रहा या घर या बाहर खराब दिन बीता। तो बार-बार उसी पर न सोचें या उसी की बात न करें। बेहतर है कि कुछ समय के लिए खुद को उससे अलग कर लें। ऐसी बात सोचें जो आपको खुशी दे। यह विचार किसी दोस्त, किसी यादगार यात्रा या बच्चों से जुड़ी अच्छी बातों का हो सकता है। ध्यान रखें, जितना अच्छे विचारों पर पकड़ बनेगी, उतना ही अपने भावों पर काबू रखना आसान हो जाएगा।

  • ना कहना भी सीखें-

अपनी सीमाएं तय करें। जबरदस्ती कामों को खुद पर न लादें। झूठे वादे करने के बजाय सीधे ना कहना सीखें। दूसरों को बार-बार खुश करने की कोशिशें करना छोड़ दें। अपने मान-सम्मान और मूल्यों का भी ध्यान रखें। ऐसा करके आप खुद को मजबूत महसूस करेंगे। दूसरों का भी आप पर विश्वास बढ़ेगा। अपनी सीमाएं तय करके आप अपनी ऊर्जा और समय दोनों को बचा सकते हैं।

  • खुद को पसंद करें-

दूसरों को पसंद करना, उनकी प्रशंसा करना अच्छी बात है, पर खुद से भी प्यार करें। अपनी खूबियों को पहचानें। हर समय खुद को कोसें नहीं। तुलना बंद करें और अपनी उपयोगिता समझें। तभी आप दूसरों को भी कुछ दे सकते हैं। यह जान पाते हैं कि यह दुनिया उदार है। आपके लिए भी यहां खूब प्यार और खुशियां हैं। आपके भी कई अपने हैं।

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