उत्तराखंडः किडनैप नहीं घर में क्वारंटाइन थे IAS अफसर, फोन न उठाने पर मंत्री ने पुलिस को लिखा था पत्र

महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग में टेंडर निकाले जाने के बाद आईएएस अधिकारी के गायब होने को लेकर मंत्री रेखा आर्य ने देहरादून के एसएसपी को लिखा था पत्र।

देहरादून। उत्तराखंड के महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग के निदेशक IAS अफसर वी षणमुगम मंगलवार रात अपने घर में मिल गए हैं। विभाग की मंत्री रेखा आर्य के आईएएस के ‘गायब’ होने की आशंका जताने पर देर रात पुलिस षणमुगम के घर पहुंची तो वह घर पर मिल गए। उन्होंने बताया कि वह क्वारंटाइन हैं। इससे पहले रविवार से फ़ोन न उठाने की वजह से महिला और बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य ने विभाग के निदेशक के अपहरण की आशंका जताते हुए देहरादून के एसएसपी को पत्र लिखकर षणमुगम की तलाश करने को कहा था।

भूमिगत हो गए IAS
महिला और बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य ने मंगलवार शाम देहरादून के एसएसपी को पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने विभाग के निदेशक महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास वी षणमुगम को ढूंढने का आग्रह किया था। पत्र में लिखा गया था कि महिला सशक्तिकरण बाल विकास निदेशक के पद पर तैनात अपर सचिव और 20 सितंबर रविवार से ‘गायब’ हैं। उनके फ़ोन बंद हैं और उनसे संपर्क करने की कोशिशें कई बार नाकाम हो गई हैं।

रेखा आर्य ने पत्र में लिखा है कि उनके निजी सचिव ने षणमुगम के निजी सचिव से भी लगातार संपर्क किया लेकिन उनका (षणमुगम का) कोई पता नहीं चल पाया है। पत्र में लिखा है, “ऐसा लगता है जैसे किसी ने निदेशक का अपहरण कर लिया है और या फिर वह खुद ही अंडरग्राउंड हो गए हैं। क्योंकि फिलहाल महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग में मानव संसाधन आपूर्ति के लिए निविदा प्रक्रिया गतिमान थी। इसमें गड़बड़ी और धांधली होने पर वह अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।”पत्र में आगे लिखा है, ” ऐसी स्थिति में खुद को बचाने के लिए वह भूमिगत हो गए हैं। इसलिए वी षणमुगम अपर सचिव, निदेशक महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास की खोजबीन कर उन्हें सकुशल लाए जाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही उन्हें यह भी बताया जाए कि विभागीय मंत्री ने उन्हें तलब किया है।”

बता दें कि राज्य मंत्री रेखा आर्य के विभाग में मानव संसाधन की आपूर्ति के लिए टेंडर निकाले गए थे। इस टेंडर को लेकर टेक्निक्ल बिड संबंधी शिकायतें मंत्री को मिली थीं। इस पर मंत्री ने निदेशक को फोन कर प्रक्रिया को रोकने के लिये संपर्क करना चाहा था लेकिन निदेशक का फोन बंद मिला। सचिवालय स्थित ऑफिस से भी संपर्क न होने के चलते मंत्री जी को पता ही नही चल पा रहा था कि बीते तीन दिन से उनके विभाग के निदेशक हैं कहां और फोन लगातार स्विच ऑफ़ आने के पीछे की वजह क्या है?

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