प्यार में हमेशा मुझे धोखे ही मिलते रहे हैं – कंगना (साक्षात्कार)

कंगना को जितनी सुर्खियां उनके आला दर्जे के अभिनय के कारण मिलती रही हैं, उससे कहीं ज्यादा वह अपने बेबाक बयानों के कारण आजकल सुर्खियों में रहने लगी हैं। ’नेपोटिज्म’, पुरूष और महिलाओं के सैक्स को लेकर अलग-अलग मानदंडों और हीरो के मुकाबले हीरोइन की कम फीस के बारे में अपने विचारों और बयानों को लेकर वह काफी सुर्खियों में रही हैं।
आज इंडस्ट्री का हर छोटा बड़ा कलाकार और फिल्म मेकर, करण जौहर, से खौफ खाता सा नजर आता है, वही कंगना ने उन्हें वंशवाद का वाहक और मूवी माफिया तक कह डाला। दोनों के बीच लंबे अरसे तक जुबानी जंग चलती रही।
अध्ययन सुमन, आदित्य पंचोली और ऋतिक के साथ कंगना का नाम जुड़ा। ऋतिक रोशन और उनके बीच बाकायदा कानूनी और मुंह जुबानी, एक लंबी लड़ाई चली थी। इसने कंगना को काफी वक्त तक सुर्खियों में रखा। आज भी वह ऋतिक रोशन की आलोचना करने का कोई अवसर खाली नहीं जाने देती।
कंगना अब तक 29 फिल्में कर चुकी हैं। उनकी पिछली फिल्में ’कट्टी बट्टी’ (2015), ’रंगून’ (2017) और ’सिमरन’ (2017) बुरी तरह फ्लाॅप रहीं। आज के दौर में जबकि टिकिट खिड़की सिनेमा की जमीनी हकीकत है, ऐसे में तय है कि कंगना के पैरों तले की जमीन कमजोर हो रही है। वह मणिकर्णिकाःद क्वीन आॅफ झांसी’ की शूटिंग पूरी कर चुकी हैं। 2018 में हर सप्ताह कोई न कोई बड़ी फिल्म मैदान में होने से फिल्म की रिलीज डेट तय नहीं हो पा रही है। इसमें कंगना झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के किरदार में नजर आएंगी।
30 करोड़ लागत में बनी ’सिमरन’ कंगना की लगातार तीसरी फ्लाॅप थी । इसलिए 90 करोड़ में बनी मणिकर्णिकाः द क्वीन आॅफ झांसी’ उनके लिए असल इम्तिहान है। ’तनु वेड्स मनु रिटन्र्स’ के बाद आनंद एल राय ने कंगना के साथ फिल्में बनाना छोड़ दिया है। इसलिए मणिकर्णिकाः द क्वीन आॅफ झांसी’, कंगना के कैरियर के लिए और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
कंगना राजकुमार राव के अपोजिट ’मेंटल है क्या’ कर रही हंै। इसका निर्माण एकता कपूर द्वारा किया जा रहा है। राज कुमार राव के साथ यह ’क्वीन’ के बाद कंगना की दूसरी फिल्म है। कहा जा रहा है कि इसके लिए कंगना ने 15 करोड़ की प्राइज ली है।
अश्विनी अय्यर तिवारी की ’पंगा’ में, कंगना एक कबड्डी प्लेयर का किरदार निभायेंगी। उत्तर भारत की कबड्डी खिलाड़ी की इस कहानी में कंगना एक सिंगल वूमन से शादी शुदा औरत तक के कई सारे रंगों में नजर आएंगी । इसमें कंगना के अपोजिट, अली फजल को मेन लीड में लिए जाने की चर्चा है।

प्रस्तुत हैं कंगना के साथ की गई बातचीत के मुख्य अंशः

‘मणिकर्णिकाः द क्वीन आॅफ झांसी’ के बारे में कुछ बताएं ?
इसे ’बाहुबली’ जैसी कामयाब सीरीज लिखने वाले जाने माने लेखक के.वी.विजयेन्द्र ने लिखा है। यह झांसी की रानी लक्ष्मी बाई पर आधारित है। इसमें मैं लक्ष्मीबाई का किरदार निभा रही हूं। मुझे यकीन है कि यह फिल्म लोगों के बीच गर्व की भावना पैदा करेगी।

कहा जा रहा है कि इस फिल्म के बाद आप एक्टिंग छोड़कर पूरी तरह सिर्फ डायरेक्शन में बिजी हो जाना चाहती हैं ?
नहीं, एक्टिंग मेरा पहला प्यार है। इसे छोड़ने का तो सवाल ही नहीं है। लेकिन इसके बाद अब मैं अपनी ज्यादातर फिल्मों का निर्देशन खुद ही करूंगी लेकिन बाहरी मेकर्स के शानदार आॅफर्स पहले की तरह स्वीकार करती रहूंगी।

बाॅलीवुड की दूसरी नायिकाएं, फिल्मों में जहां आदर्श लड़की के किरदार निभा रही हैं, वहीं आपकी दिलचस्पी रियल लाइफ किरदारों में ज्यादा दिखाई देती है?
एक कलाकार की असल परीक्षा यही होती है कि वह अपने किरदार को किस कदर, सम्मान और प्यार दे पाता है। जब मुझे इस तरह के किरदारों में कामयाबी मिल रही है और लोग मेरे काम को पसंद कर रहे हैं, ऐसे में भला मैं इधर उधर क्यों भटकती फिरूं।

आपकी छवि एक विद्रोही कलाकार की बनती जा रही है ?
जो महिलाएं अपनी पसंद से चलती हैं और अपने अधिकारों के लिए लड़ते हुए जिनकी जुबान पर हमेशा सिर्फ सच्चाई होती है, उन्हें विद्रोहियों के रूप में ही देखा जाता है। मैं अपना आकलन अपनी सहजता या लड़ने की भावना से नहीं करती हूं। यदि लोग ऐसा करते हैं तो मैं उन्हें रोकना भी नहीं चाहूंगी क्योंकि यह उनकी अपनी मर्जी का सवाल
है।

आप हर वक्त सिर्फ हीरोइन ओरियंटेड फिल्में करने की जिद पर अड़ी रहती हैं। आपकी इस तरह की जिद कहां तक वाजिब है ?
मेरी तो शुरू से यही कोशिश रही है कि मैं सिर्फ इस तरह की फिल्में करूं। असल में मैं अपनी हर फिल्म के प्रति बहुत डेडिकेटेड हूं इसलिए मेरे प्रोड्यूसर्ज भी मेरी बहुत इज्ज्त करते हैं। एंडोर्समेंट के जरिये मेरी अच्छी खासी आय हो जाती है। इसलिए मैं बेफिक्र होकर साल में अपनी पसंद की एकाध फिल्म करके भी गुजारा कर लेती हूं। इससे ज्यादा का लालच मुझे कभी नहीं रहा।

पिछले दिनों आपने फिल्मों में आइटम नंबर्स करने वाली हीरोइन्स के बारे में काफी उल्टा सीधा कहा ?
नहीं, मैंने किसी के बारे में कुछ नहीं कहा। मैंने तो सिर्फ अपनी बात की थी। मैंने कहा था कि मैं आइटम नंबर इसलिए नहीं करती क्योंकि उनमें करने के लिए कुछ नहीं होता। चूँकि यह अश्लील होते हैं इसलिए मुझे लगता है कि इन पर पाबंदी लगाने की जरूरत है। मैं ऐसी किसी चीज का हिस्सा नहीं बन सकती जो हमारे लिए हमारे समाज के लिए और हमारे बच्चों के लिए हानिकारक हो।

शादी कब कर रही हैं ?
मुझे नहीं पता कि हमारी सोसायटी क्यों चाहती है कि एक महिला को 30 के बाद शादी कर लेनी चाहिए। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। जहां तक मेरी बात है तो न तो मुझे शादी की कोई जल्दी है और ना ही मैं अब तक 30 की हुई हूं।
अब तक आप ’मिस्टर राइट’ की तलाश के लिए कई कोशिशें कर चुकी हैं लेकिन हर बार आपको नाकामी ही मिली ?
उसे नाकामी नहीं, धोखा कहिए। मैंने बड़ी शिद्दत के साथ जिसके साथ दिल लगाने की कोशिश की, वही मुझे छोड़कर चला गया। मुझे हर बार धोखे मिले हैं। अब तो मुझे लगने लगा है कि, मैं सबसे बड़ी लूजर हूं। जब भी अपने बीते कल के बारे में सोचती हूं, मुझे काफी दुःख होता है लेकिन अब मैंने खुद को संभाल लिया है और इन मामलों से अब मैं बहुत आगे निकल चुकी हूं।

आपके बारे में जब नेगेटिव बाते सामने आती हैं, आप कितना तनाव महसूस करती हैं ?
पहले मुझे काफी टेंशन होती थी लेकिन जब मैंने देखा कि उसके कारण मेरा काम प्रभावित होने लगा है तो मैंने उससे बाहर निकलने की कोशिश की और काफी हद तक मुझे कामयाबी मिली। इसलिए अब मुझे बिलकुल टेंशन नहीं होती। मैं हर वक्त, हर तरह की परिस्थिति से लड़ने के लिए तैयार रहती हूं। मैं अच्छी तरह समझ चुकी हूं कि यदि आप अच्छा भी करेंगे, तब भी लोग आपकी आलोचना ही करेंगे। इस तरह की आलोचनाएं मुझे कामयाब होने का एहसास कराती रहती हैं।

-सुभाष शिरढोनकर-

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