ऑनलाइन शॉपिंग करने से पहले जानें लें No Cost EMI से जुड़ी सभी बातें, वरना लग सकता है आपको चूना

ऑनलाइन शॉपिंग में कई उत्पाद ‘नो कोस्ट ईएमआई’ (No Cost EMI) के विकल्प पर बेचे जाते हैं। क्या आपको वाकई में इसका मतलब पता है? नो कोस्ट ईएमआई के साथ कंपनियां छूट और आकर्षक ऑफर देती हैं।

नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग में कई उत्पाद ‘नो कोस्ट ईएमआई’ के विकल्प पर बेचे जाते हैं। क्या आपको वाकई में इसका मतलब पता है? नो कोस्ट ईएमआई के साथ कंपनियां छूट और आकर्षक ऑफर देती हैं। ऐसे में क्या आपको कोई सामान नो कोस्ट ईएमआई देखकर ही खरीद लेना चाहिए या नहीं? क्या आप इससे फायदे में रहेंगे या नहीं? हम बता रहे हैं कि नो कोस्ट ईएमआई क्या है और यह स्कीम आपके लिए कितना फायदा-नुकसान करती है। इन दिनों ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनियां अमेजोन और फ्लिपकार्ट समेत कई रिटेल स्टोर लॉकडाउन हटने के बाद इस फेस्टिव सीजन में उपभोक्ताओं को अपने आकर्षक सौदों से लुभा रहे हैं। छह महीने के बाद लोग जमकर खरीददारी कर रहे हैं। देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आती नजर आ रही है। ऐसे में कई बड़े निजी बैंकों ने ई-कॉमर्स कंपनियों से साठगांठ की है। इसमें उपभोक्ताओं के भारी छूट और आकर्षक ऑफर के साथ उत्पादों को नो कॉस्ट ईएमआई’ विकल्प पर भी बेचा जा रहा है।

क्या है ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ (No Cost EMI)
नो-कॉस्ट ईएमआई ज्यादा से ज्यादा सामान बेचने के लिए अपनाया जाने वाला नुस्खा है। पहला तरीका यह कि नो कॉस्ट EMI पर आपको उत्पाद बिना किसी छूट के पूरी कीमत पर खरीदना होता है। इसमें कंपनियां ग्राहकों को दी जानी वाली छूट को बैंक को ब्याज के तौर पर देती है। इसमें दूसरा तरीका यह होता है कि कंपनियां ब्याज की रकम को पहले ही उत्पादों की कीमत में शामिल कर लेती है।

ये स्कीम कैसे करती है काम
नो कोस्ट ईएमआई को आमतौर पर तीन भागों में बांटा जाता है। इसमें रिटेलर, बैंक और उपभोक्ता शामिल होते हैं। कुछ बैंक हैं जो उत्पादों पर नो कोस्ट ईएमआई का विकल्प देते हैं। हालांकि, इस विकल्प को चुनने के लिए आपके पास उस बैंक का क्रेडिट कार्ड होना चाहिए। इसके अलावा आप नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) से भी ईएमआई कार्ड ले सकते हैं। रिटेलर्स केवन उन उत्पादों पर ही नो कोस्ट ईएमआई का विकल्प देते हैं जो उसे जल्दी से जल्दी बेचने होते हैं। बता दें कि कुछ ईएमआई कार्ड के लिए फीस भी चुकानी पड़ती है। नो कॉस्ट ईएमआई की स्थिति में रिटेलर्स उपभोक्तआों को ब्याज जितनी राशि की छूट देते हैं।

नो कॉस्ट ईएमआई लेना चाहिए
एचडीएफसी (HDFC), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), आरबीएल (RBL), येस बैंक (YES BANK), एक्सिस बैंक (AXIS BANK), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI) स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक (SCB) और कोटक महिंद्रा बैंक (KMB) अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्पादों को खरीदने के लिए नो कॉस्ट ईएमआई (No Cost EMI) का विकल्प देते हैं। बता दें कि अधिकांश मामलों में कैश पर छूट ईएमआई से अधिक नहीं होता है। इसे आप एक तरह से कमाई का जरिया कह सकते हैं, साथ ही पुराना स्टॉक जल्दी से जल्दी बेचा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि व्हाइट उत्पादों (एसी, मोबाइल, फोन, फ्रिज और वॉशिंग मशीन) के लिए इस विकल्प को न चुने तो बेहतर है।

क्या कोई अतिरिक्त खर्च है?
जब आप-नो-कॉस्ट EMI स्कीम चुनते हैं और आप रिटेलर्स से उत्पादों को खरीदते हैं, तो हो सकता है उनके साथ जुड़े कुछ अग्रिम कैश डिस्काउंट आपको न मिले। इसके अलावा, आप प्रत्येक किस्त पर माल और सेवा कर (GST) साथ ही प्रसंस्करण शुल्क जैसे अतिरिक्त लागतों का भी भुगतान करना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए एचडीएफसी और कोटेक महिंद्रा बैंक 199 रुपये प्रोसेसिंग फीस चार्ज करते हैं जो आपके द्वारा लिये गये उत्पाद की पहली महीने की किस्त में जुड़कर आती है। आपके कार्ड स्टेटमेंट में हर महीने उत्पाद मूल्य से अधिक आपकी खरीददारी पर जीएसटी लगता रहेगा।

‘नो-कॉस्ट EMI’ स्कीम के लोन जाल से कैसे बचें
यह स्कीम उधारकर्ताओं और खरीदारों के लिए कर्ज का जाल बन सकती है। यदि आप समय पर किस्त जमा नहीं कर पाते हैं तो बैंक पेनल्टी के साथ आपके किस्त पर अतिरिक्त चार्ज करते हैं जो महीने का 2 से 3.5 प्रतिशत होता है। बता दें कि गैर-पारदर्शी ईएमआई योजनाओं को आरबीआई ने उनके गैर-पारदर्शी शर्तों और छिपे हुए शुल्क के कारण बंद कर दिया था। ऐसे में किसी भी अतिरिक्त चार्ज से बचने के लिए उपभोक्ता समय पर ही किस्त अदा करें।

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