हिमालयन कॉन्क्लेव सम्मेलन पर सरकार की तारीफ कर सुझाव दिए हरीश रावत ने

प्रदेश सरकार की पहल पर 28 जुलाई को मसूरी में होने वाले हिमालयन कॉन्क्लेव सम्मेलन को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सराहा है। अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि यह हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन शायद सरकार का पहला शुभ कार्य है। उन्होंने इसके साथ हिमालयी राज्यों और निवासियों के हित संरक्षण के लिए सुझाव भी दिए। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भले ही भाजपा को निशाने पर लेते रहे हों, लेकिन प्रदेश सरकार की हिमालयन कॉन्क्लेव पहल उन्हें अच्छी लगी है। Image result for himalayan conclave meeting mussoorie uttarakhand
उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के अंतिम बजट में हिमालयी राज्यों को ग्रीन बोनस देने का प्रावधान किया गया था, उसे फिर से शुरू करवाया जाना चाहिए। हिमालयी राज्यों के सीमांत गांवों के प्रत्येक व्यक्ति को हर महींने दो हजार रुपये आजीविका बोनस, पैरा फोर्सेज भर्ती में नौजवानों को दो प्रतिशत का विशेष क्षेत्र आरक्षण दिए जाने का सुझाव भी दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में तीन गुना ज्यादा लागत आती है। इसकी पूर्ति केंद्र सरकार द्वारा की जानी चाहिए। हिमालयी राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देने, हिमालयी राज्यों में स्थापित औद्योगिक इकाइयों पर केंद्रीय करों की छूट 10 साल के लिए बढ़ाने, दस्तकारी वस्तुओं के निर्यात को इंटीग्रेटेड उत्पादन एवं मार्केटिंग सर्किट तैयार करने, जल संभरण को राष्ट्रीय जरूरत मानते हुए हिमालयी राज्यों को विद्युत उत्पादन टैक्स की छूट या विद्युत और जल आय में हिस्सेदारी को दोगुना करने, रोपवे-ट्रॉलीवेज को सड़क के समकक्ष दर्जा देने, हिमालयी राज्यों के उपभोक्ताओं को 25 प्रतिशत अनुदानित गैस और बिजली दिए जाने के सुझाव भी दिए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हिमालयन कॉन्क्लेव को लेकर सुझाव देने के साथ ही चुटकी भी ली। और अंत में यह सवाल किया कि क्या आप इन बिंदुओं पर बहस करेंगे ?

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