108 एम्बुलेंस के मना करने पर पिता घायल बेटे को पीठ पर लादकर तीन किलोमीटर पैदल चला, कई और मुश्किलों का सामना कर पहुंचाया अस्पताल

उत्तराखंड वह राज्य है जिसने सबसे पहले एयर एम्बुलेंस शुरू की थी और पुरे देश में उत्तराखंड का नाम हो गया, लेकिन धरातल में हालात कुछ और ही हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के लोग आज भी एम्बुलेंस के लिए परेशान हैं। सरकार ने एयर एम्बुलेंस तो शुरू कर दी लेकिन पहले से ही मौजूद एम्बुलेंस वाहनों में तेल भरना ही भूल गया। आये दिन यह सुनने को मिलता रहता है कि 108 एम्बुलेंस इसलिए घटना स्थल पर नहीं आ सकती है क्योंकि वाहन में तेल की कमी है। जब राज्य के पास पहले से खड़े वाहनों के लिए ही तेल नहीं है तो ऐसे में एयर एम्बुलेंस का खर्चा राज्य सरकार भला कैसे उठाएगी। किसी भी कार्य को सिर्फ शुरू कर देना और फिर उस तरफ देखना ही भूल जाना क्या ऐसे कार्य किया जाता है? क्या इस तरह से राज्य सरकार अपने प्रदेश वासियों का ख्याल रखेगी?

ऐसा ही एक मामला उत्तराखंड के बागेश्वर में नजर आया है जहाँ जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल तो हैं ही, लेकिन अब चिकित्साकर्मी भी असंवेदनशील हो गए हैं। कपकोट के गांव रिखाड़ी में पहाड़ी से गिरे किशोर को अस्पताल लाने के लिए पिता ने जब 108 सेवा को फोन किया तो उन्होंने असमर्थता जताते हुए रिखाड़ी तक आने से मना कर दिया। इस पर पिता ने बेटे को पीठ पर लादा और तीन किमी पैदल चलकर बाबे बैंड तक लाया। उसके बाद पिकअप से सौंग लाया, जहां से 108 एंबुलेंस से कपकोट अस्पताल लाया जा सका।

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सोमवार को रिखाड़ी निवासी चंचल राम का 15 वर्षीय पुत्र नीरज कुमार आर्य पहाड़ी से गिरकर घायल हो गया था। उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम नहीं हो पाया। पिता चंचल राम ने बताया कि उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए जब 108 को फोन किया तो उसने वाहन में तेल न होने और वाहन के खराब होने की बात कहकर रिखाड़ी तक आने से इनकार कर दिया। बाद में गुजारिश करने के बाद एंबुलेंस कपकोट से सौंग पहुंची। चंचल राम ग्रामीणों की मदद से नीरज को बाबे बैंड तक पीठ पर और वहां से पिकअप से सौंग तक लाए। उसके बाद यहां से 108 एंबुलेंस से कपकोट लेकर पहुंचे।

कपकोट में नीरज का प्राथमिक उपचार किया गया। हाथ में फ्रैक्चर होने और मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल बागेश्वर के लिए रेफर तो कर दिया लेकिन एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कराई। नीरज के पिता चंचल राम ने प्राइवेट टैक्सी किराए पर ली तब जाकर वह बागेश्वर अस्पताल पहुंचे। क्या 108 सेवा सरकार ने इसलिए शुरू की थी? एक घायल व्यक्ति को जो उपचार 108 एम्बुलेंस में मिल सकता था क्या वही हालात तब भी रहे होंगे जब उस युवक को पीठ पर लाद कर लाना पड़ा सिर्फ इसलिए क्योंकि राज्य सरकार के पास 108 एम्बुलेंस सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रयाप्त तेल नहीं था। क्या हमारा राज्य विकास के पथ पर अग्रसर है? क्या हमने ऐसे ही विकास की कामना की थी अपनी राज्य सरकार से?

CMO बागेश्वर, डॉ. जेसी मंडल बताते हैं कि 108 एंबुलेंस की हड़ताल चल रही है। 108 सेवा दूसरी कंपनी के हाथों में जा रही है, जिससे कुछ दिक्कतें हैं। रिखाड़ी के नीरज को एंबुलेंस नहीं मिलना गंभीर मामला है। मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं था। अन्यथा परिवार को प्राइवेट कार की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती। विभाग से ही उन्हें एंबुलेंस मिल जाती। अब भी यदि नीरज को हायर सेंटर जाना होगा तो विभागीय एंबुलेंस मुहैया कराई जाएगी।

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