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उत्तराखंड में निजी स्कूलों की मनमानी, शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 3444 बच्चे को नहीं दिया एडमिशन
 

रामनगर । उत्तराखंड में निजी स्कूलों की मनमानी का एक नया मामला सामने आया है। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत गरीब व वंचित बच्चों को प्रवेश देने में निजी स्कूल मनमानी कर रहे हैं। प्रवेश की तिथि बीतने के बाद भी राज्य के निजी स्कूलों ने 3444 बच्चों को एडमिशन से वंचित रखा है। आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर व वंचित परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में निश्शुल्क प्रवेश देना होता है। इसके लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। विभाग ने शैक्षिक सत्र 2022-23 के लिए राज्य में 33,672 सीटें निर्धारित की। 28 हजार से अधिक आवेदन आए, लेकिन साढ़े चार हजार आवेदन मानक पूरे न होने के कारण रद हो गए। 17662 बच्चों को उनके पसंदीदा स्कूल आवंटित हुए। 20 जुलाई तक आवेदन प्रक्रिया पूरी कर प्रवेशित बच्चों की सूची विभागीय पोर्टल अपडेट की जानी थी। निजी स्कूलों ने 13710 को ही प्रवेश दिया है। 508 आवेदन जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं करने के कारण निरस्त हो गए। 3444 बच्चों को अब भी स्कूल में प्रवेश का इंतजार है। शिक्षा विभाग ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए वंचित बच्चों को दो दिन में प्रवेश देते हुए ब्योरा विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

सीईओ को 31 तक प्रवेश का समय
आरटीई के तहत प्रवेश नहीं दिए जाने के मामले में अपर राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा डा. मुकुल सती ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सभी जिलों के मुख्य शिक्षाधिकारी को निर्देश देते हुए बच्चों को 31 जुलाई तक प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए हैं। चमोली को छोड़ सभी जिलों में आवेदन लंबित हैं। प्रदेश में सीटों के सापेक्ष कम आवेदन आने की वजह से दूसरी बार मौका दिया गया है। गरीब व वंचित वर्ग के परिवार कक्षा एक में प्रवेशित कराने के लिए आनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। पांच अगस्त से 25 अगस्त तक आवेदन होंगे। पांच सितंबर को लाटरी निकाली जाएगी। आरटीई के तहत प्रवेशित बच्चों की फीस की सरकार प्रतिपूर्ति करती है। समग्र शिक्षा के अपर राज्य परियोजना निदेशक डॉ मुकुल सती ने बताया कि कई निजी स्कूल आरटीई में प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं। इस संबंध में सभी आदेश जारी किए गए हैं। 31 जुलाई तक प्रवेश न देने पर स्कूलों के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।