धाद लोकभाषा ने अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर्वतीय काव्य सम्मेलन का आयोजन

धाद संस्था विगत 30 सालो से सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्य में लगी है। इसी क्रम में धाद संस्था के लोकभाषा एकांश ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन की अध्यक्षता धाद के केंद्रीय अध्यक्ष लोकेश नवानी ने किया। कार्यक्रम के मुख्यवक्ता दून विश्वविद्यालय देहरादून के लैंगुवेज डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर मधुरेन्द्र झा ने अपने वक्तव्य में विश्व की भाषा एवं क्षेत्रीय भाषा के वैश्वीकरण करण के कारण क्षेत्रीय भाषा प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही है, जिस कारण यूनेस्को ने सभी भाषा बोलियों के संरक्षण के लिये अंतराष्ट्रीय मातृभाष दिवस घोषित किया।

वंही लोकेश नवानी ने अपने वकतव्य में कहा कि भाषा हजारों वर्षों में कई काल क्रम में बनती है, उसकी अपनी सम्पदा है, उसकी अपनी पहचान है, उनकी अपनी संस्कृति है। यूनेस्को ने 1999 में अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का कार्यक्रम शुरू किया। आज के बाजारीकरण के दौर में सभी भाषाएं सक्रमण के दौर से गुजर रही हैं, धीरे धीरे विश्व की बहुत सी भाषा विलुप्त होने के कगार पर है। यूनेस्को की एक रिपोर्ट में सामने आया कि भारत मे 196 भाषाये संकट में है जिनमे से उत्तराखंड की सभी भाषाये संकट में है। जनजाति की बहुत सी भाषाएं विलुप्त हो गयी हैं, ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष में ऐसी भाषाएं जो संक्रमकाल से गुजर रही हैं, ऊँन्हे बचाने का एक प्रयास है। इसी क्रम में धाद अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर धाद उत्तराखंड में वर्ष 2008 से कार्यक्रम का आयोजन करती आ रही है। उत्तराखंड के परिपेक्ष्य में गढवाली, कुमाऊनी, जौनसारी, भोटिया, लोकभाषा को बोलने वाले लोगो का प्रतिशत गिर गया है, इसको लेकर भी चिंतन करने की आवश्यकता है, इन्हें बचाना समाज का कर्तव्य है। अंतराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस के अवसर पर पर्वतीय कवि सम्मेलन किया गया, जिंसमे कवियों ने गढ़वाली, कुमाऊनी भाषा मे काव्य पाठ किया गया।

हरीश कंडवाल मनखी ने भाषा के बाजारीकरण के दौर में गढवाली भाषा के विज्ञापन शीर्षक पर ” जूश हो त लाल बुरांश, बाकी सब बकवास, लक्ष्मण रावत ने भूत च की जांदुवन अभिषेक डोबरियाल ” सरस्” ने धार मा बीणा ऐ ग्यायी, अर कख बीटे की समित्रा जुगलान ने मकडू की पीड़ा, बीना बेंजवाल ने आंखयूं आंसू हमरा छौन्द. खैरीयूँ साँसू हमरा छौन्द, दिनेश डबराल ने बिजी जै, प्रेमलता सजवाण ने द मरण द्याव नौंन तै, बीना कंडारी ने सब कुछ बणायी अपर मुल्क नि बणाई, गोपाल बिष्ट ने मसधुसूदन थपलियाल ने हम तै हकानाणा छन ,मनोज भट्ट गढ़वळी ने जखम होला हैरी सारी, ऊंच डांडा, ठंडो पाणी, शांति बिंजोला ने मि गढ़वळी छो, सुरेश स्नेही ने या धरती कथगा स्वाणी छ, सत्यनाद बडोनी ने श्रोताओ को खूब गुदगुदाया।

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *