देवभूमि करे पुकार

देवभूमि करे पुकार
डूब मरो, शर्म करो ।
हे लोकतंत्र की
चुनी सरकार ।।

व्याभिचारी दुराचारी
घूम रहें गांव बाजार ।
तपोभूमि में बढ गये
नागफनी के रिश्तेदार ।।
देवभूमि करे पुकार……

वोट बैंक का खेल खेलते
सत्ता के मद में आंख मूंदते ।
जो बाहरी हो गये खासमखास
मूल निवासी बन गये बेकार ।।
देवभूमि करे पुकार……

देवभूमि का कर्ज उतारो ।
करके जनता का उद्धार । ।
देवभूमि करे पुकार
डूब मरो, शर्म करो ।
हे लोकतंत्र की
चुनी सरकार ।।

बहु बेटियां लुट रही है
खुली फिजा में घुट रही है ।
कसूर उनका, क्या था बताओ
जो झेल रही है अत्याचार ।।
देवभूमि करे पुकार……

जब बेटी बचाओ बेटी पढाओ
देकर नारा, सो गई सरकार ।
हे कान्हा इस युग में भी आना
करने देवभूमि का बेडा पार ।।

वीरेन्द्र जुयाळ “उप्रि” उर्फ ‘अजनबी’

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