आयुष मंत्री से निदेशक होम्योपैथिक डाॅ राजेंद्र सिंह को कार्यमुक्त करने की मांग

प्रान्तीय होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा संघ ने लगाये निदेशक पर गंभीर आरोप

डाॅक्टर और मेडिकल स्टाॅफ बिना मास्क, सैनेटाइजर, ग्लब्स, थरमल स्कैनर के मरीजों का उपचार करने को मजबूर

देहरादून। प्रान्तीय होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा संघ ने कार्यवाहक होम्योपैथिक डाॅ राजेंद्र सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ के अध्यक्ष डाॅ अमित नेगी और महासचिव डाॅ शैलेन्द्र ममगाई ने आयुष मंत्री हरक सिंह रावत को पत्र लिखकर कार्यवाहक निदेशक डाॅ राजेंद्र सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की मांग की है। संघ द्वारा पत्र में 8 गंभीर विन्दुओं को आयुष मंत्री हरक सिंह रावत के संज्ञान में लाया गया है।

नौकरी से बर्खास्त करने की देते हैं धमकी
संघ के अध्यक्ष डाॅ अमित नेगी ने बताया कि डॉ राजेंद्र सिंह चिकित्सा अधिकारियों व जिला होम्योपैथिक अधिकारियों के साथ होने वाली वभागीय बैठकों में सामान्य शिष्टाचार का भी पालन नहीं करते हैं तथा महिला चिकित्सा अधिकारी के समाने सार्वजनिक रूप से अभद्र टिप्पणियों गालियों का निरंतर प्रयोग कर अपमानित करते रहते हैं। विभागाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन होकर पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कार्य करते हैं और विभाग में गुटबाजी को श्रेय देते हैं। उनके द्वारा बार-बार अपने अधीनस्थ अधिकारियों कर्मचारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि करने का नौकरी से बर्खास्त करने की धमकी दी जाती है।

डाॅ रक्षा रानी रतूड़ी को द्वेषपूर्ण तरके से हटाया
संघ के अध्यक्ष डाॅ अमित नेगी ने बताया कि कार्यवाहक जिला अध्यक्ष चिकित्सा अधिकारी हरिद्वार डॉक्टर रक्षा रानी रतूड़ी को बिना कारण बताओ नोटिस के साथ दोषपूर्ण तरीके से हटा दिया गया। जिसका संघ प्रबल विरोध करता है।

सरकारी धन के दुरूपयोग का आरोप
संघ के अध्यक्ष डाॅ अमित नेगी ने आरोप लगाया कि राजकीय होम्यौपैथिक चिकित्सालय के लिए जो औषधियां खरीदकर प्रदेशभर के चिकित्सालयों में वितरित की जाती हैं वह चिकित्सालय के मांग के अनुरूप न होने के कारण अनावश्यक औषधियों का भंडारण चिकित्सालय में हो जाता है। चिकित्सालयों द्वारा मांग पत्र के के अनुरूप औषधियां उपलब्ध न कराये जाने से चिकित्सीय कार्य में बाधा उत्पन्न होती है जो कि सरकारी धन का दुरुपयोग है।

बिना मास्क, सैनेटाइजर, ग्लब्स, थरमल स्कैनर के मरीजों का उपचार करने को मजबूर
कोरोना वायरस जो कि पूरे विश्व में महामारी घोषित है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे चिकित्सकों और मेडिकल स्टाॅफ की सुरक्षा का खास ख्याल रखा जाये। बावजूद इसके चिकित्सालय में तैनात चिकित्सकों अन्य कर्मियों की स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिगत आवश्यक सुरक्षा उपकरण प्रदान नहीं किए गए हैं। डाॅक्टर और मेडिकल स्टाॅफ बिना मास्क, सैनेटाइजर, ग्लब्स, थरमल स्कैनर के मरीजों का उपचार करने को मजबूर हैं। जो कि उनकी व अन्य रोगियों में कोराना वायरस के संक्रमण की संभावना को बढ़ाता है व उनके जीवन मरण की स्थिति उत्पन्न करता है। ये निदेशक महोदय की राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रति उदासीनता व निष्क्रियता दर्शता है।

रिटार्यर होने वाले कर्मचारियों को नहीं मिल पा रही पेंशन
संघ के अध्यक्ष डाॅ अमित नेगी ने बताया कि प्रांतीय होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा संघ उत्तराखंड की प्रांतीय कार्यकारिणी द्वारा सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि डॉ राजेंद्र सिंह की कार्यशैली विभाग एवं चिकित्सा अधिकारी के हितों के विपरीत है जिस कारण समाज में विभाग एवं सरकार की छवि लगातार धूमिल हो रही है। जब से डाक्टर राजेंद्र सिंह ने कार्यवाहक निदेशक का कार्यभार ग्रहण किया है। तब से अब तक सेवानिवृत्त होने वाले किसी का अधिकारी का विगत 1 वर्ष से पेंशन प्रकरण का निस्तारण नहीं किया गया है जो कि गंभीर अनियमितता तथा सेवानिवृत्त अधिकारी एवं उसके परिवार को सामान्य भरण पोषण का अधिकार बंद करना है।

मनमाने तरीके से भंग कर दी कार्यकारिणी
संघ के अध्यक्ष डाॅ अमित नेगी ने बताया कि निदेशक के द्वारा लोकतांत्रिक एवं नियमानुसार चयनित प्रांतीय उपाध्यक्ष चिकित्सा सेवा संघ की पूरी कार्यकारिणी को कार्यकाल समाप्ति से पूर्व ही नियम विरुद्ध मनमाने तरीके से भंग करने का आदेश जारी कर दिया गया था। जिसका इनको कोई अधिकारी नहीं था साथ ही इतिहास में पहली बार किसी निदेशक द्वारा संघ के चुनाव आयोजित किए गए। जबकि तत्कालीन कार्यकारिणी द्वारा चुनाव की प्रक्रिया पूर्व में प्रारंभ की जा चुकी थी तथा इस संबंध में आयुष मंत्री के साथ वार्ता भी हो चुकी थी। चुनाव के साथ एकदिवसीय अधिवेशन की परंपरा सभी सेवा संघ में बनी हुई है। किन्तु निदेशक महोदय द्वारा अधिवेशन की भी स्वीकृति नहीं दी गई। संघ का गठन राज्यपाल की स्वीकृति से हुआ है। डॉ राजेंद्र सिंह स्वयं संघ के गठन होने पर संघ के महासचिव रहे हैं। 10 वर्ष तक इनके अलावा संघ के चुनाव और अधिवेशन नहीं कराये गये। यह लगातार संघ के लेटर पैड और महासचिव पद का दुरुपयोग करते रहे। संघ के संविधान के अनुसार कोई भी प्रशासनिक पद पर आसीन अधिकारी संघ का पदाधिकारी नहीं हो सकता इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी अधिकारी के पद पर पदोन्नति के पश्चात भी कई वर्षों के संविधान का उल्लंघन करते हुए अधिकारों का दुरुपयोग करने का प्रमाण है।

कार्यवाहक की जगह पत्र व्यवहार में खुद को लिखते हैं निदेशक
संघ के अध्यक्ष डाॅ अमित नेगी ने बताया कि डॉ राजेंद्र सिंह कार्यवाहक होते हुए भी पत्र व्यवहार में स्वयं को निदेशक लिखा करते हैं जो कि इस संबंध में जारी शासनादेश का उल्लंघन है। डाक्टर राजेंद्र सिंह की विभिन्न अनियमितताओं की शिकायतों की विस्तृत सूचना एवं पूर्व कार्यवाहक निदेशक द्वारा शासन को प्रेषित की गई थी। जिसमें डाॅक्टर राजेंद्र सिंह के शैक्षणिक दस्तावेजों की समीक्षा एवं एक महिला चिकित्सा अधिकारी के प्रवक्ता के आरोपों की सूचना शासन को उपलब्ध कराई गई थी। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ आरोपों की जांच की मांग करता है तथा जांच पूर्ण होने से पूर्व वर्तमान कार्यवाहक निदेशक राजेंद्र सिंह करने के प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू न करने का अनुरोध करता है।

चिकित्सा अधिकारियों को नहीं दिया गया कोई भत्ता
संघ के अध्यक्ष डाॅ अमित नेगी ने बताया कि निदेशालय द्वारा पूर्व में डेंगू रोगी औषधि वितरण शिविर लगाए जाने के संबंध में चिकित्सा अधिकारी को आदेशित किया गया था। जिसके अनुपालन में चिकित्सा अधिकारी ने पूर्ण मनोयोग से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में जाकर औषधि वितरण का कार्य संपादित किया। इन चिकित्सा शिविरों के आयोजन हेतु किसी भी चिकित्सा अधिकारी को कोई भत्ता नहीं प्रदान किया गया जबकि शिविरों के आयोजन हेतु विशेष कार्यों में चिकित्सा अधिकारियों को अपने स्टाफ औषधियों को लाना ले जाना पड़ा की ओर से की यात्रा भत्ता की मांग भी की गई थी।
प्रान्तीय होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा संघ ने निदेशक पर गंभीर आरोप लगाते हुए आयुष मंत्री से मांग की है कि विभागी व सरकार की छवि को ध्यान में रखते हुए डाक्टर राजेंद्र सिंह से निदेशक का कार्यभार वापस लेते हुए अन्य किसी सक्षम अधिकारी को कार्यभार दिया जाये। व डाॅ राजेन्द्र सिंह की कार्यप्रणाली को देखते हुए इन्हें अनिवार्य सेवा निवृत्ति दी जाये।

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