कोरोना वायरस: टीके के असर पर कम था भरोसा, लेकिन दे रहे बेहतर परिणाम

कोरोना महामारी की लड़ाई में भारत सहित दुनिया के अन्य देश काफी हद तक आगे बढ़ चुके हैं। इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर ले जाने में टीका भूमिका निभा सकता है जिसकी खोज में ज्यादातर देश काफी सफल परिणाम तक पहुंच चुके हैं।

विशेषज्ञों ने विज्ञान के योगदान को बताया ऐतिहासिक
वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा इस बात का है कि टीका खोजने के बाद उसकी प्रभाविता को लेकर भरोसा काफी कम था। बावजूद इसके मानव परीक्षणों में कोविड टीका बेहतर परिणाम दे रहे हैं। आईसीएमआर के वरिष्ठ अधिकारी विशेषज्ञ बताते हैं कोरोना वायरस के टीके के असर को लेकर ही डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि कम से कम 50 फीसदी प्रभाविता मिलने पर ही टीका को वैश्विक स्तर पर अनुमति प्रदान की जा सकती है।

उस वक्त डब्ल्यूएचओ ने यहां तक कहा था कि टीका वायरस से 100 प्रतिशत राहत नहीं दे सकते हैं। हालांकि कुछ समय बाद जब पहला दूसरा और तीसरा परीक्षण पूरा हुआ तो ज्यादातर टीके की प्रभाविता 90 से 94 प्रतिशत तक मिल रही है। यानी जिन लोगों को टीका दिया गया उनमें 94 प्रतिशत तक एंटीबॉडी मिल रहे हैं। अमेरिकी कंपनी फाइजर अपनी टीके से 95 प्रतिशत, रूस की स्पूतनिक-5  से 92 प्रतिशत एंटीबॉडी मिलने का वादा किया है।

मॉडर्ना के टीके में 94.5 प्रतिशत एंटीबॉडी मिले
मॉडर्ना कंपनी के टीके में अब तक 94.5 फीसदी एंटीबॉडी मिले है। इस टीके को 20 डिग्री सेल्सियस पर सुरक्षित रखा जा सकता है। वहीं फाइजर कंपनी के टीके में 90 प्रतिशत से ज्यादा एंटीबॉडीज मिले हैं। यह टीका 70 डिग्री सेंटीग्रेड पर सुरक्षित रखा जा सकता है। यह टीका अगले वर्ष की शुरुआत तक आ सकता है। हालांकि भारत के 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर सुरक्षित रखे जा सकेंगे और इनके जरिए लोगों में 90 प्रतिशत से अधिक एंटीबॉडी भी मिल रहे हैं।

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