कंग्रेस कर्नाटक में उलझी रही और गोवा में भी खेल हो गया

10 जुलाई 2019 को दिल्ली में अकबर रोड कांग्रेस के केंद्रीय कार्यालय में उदासी का कारण भारत की न्यूजीलैंड से हार नहीं बल्कि गोवा से मिली एक बुरी खबर थी।

बता दें कि एक ओर कर्नाटक में गठबंधन सरकार बचाने के लिए डी.के शिवकुमार मुंबई पुलिस से जूझ रहे थे वहीं दूसरी ओर गोवा कांग्रेस में नई बगावत खड़ी हो गई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत कवलेकर जो गोवा विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और बगावत के नेता थे। वह अपने साथ 9 दूसरे विधायकों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष राजेश पाटनेकर के दफ्तर पहुंचे जहां इन दसों विधायकों के हाथ में इस्तीफा था। इसमें अतानासियो मोन्सेराते भी शामिल थे जो कुछ समय पहले ही पंजिम सीट जो कि मनोहर पर्रीकर के देहांत के खाली हुई थी वहां से उपचुनाव जीतकर आए थे।

फरवरी 2017 में 40 सीटों वाली गोवा विधानसभा में कांग्रेस को सबसे ज्यादा 17 सीट मिली थी और सत्ताधारी बीजेपी 13 सीटों पर रुक गई थी। लेकिन महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी की 3 सीटों के समर्थन के साथ बीजेपी ने 3 सीटों वाली गोवा फॉरवर्ड पार्टी का भी समर्थन लिया और कांग्रेस के दो विधायक तोड़ कर सरकार बनाई थी। Image result for congress goa karnataka

चंद्रकांत कवलेकर ने कांग्रेस छोड़ने पर कहा कि “हर आदमी चाहता है कांग्रेस सत्ता में आए लेकिन हम लोग लम्बे समय से सत्ता से बाहर हैं। ऐसे में हमारे विधानसभा क्षेत्र में विकास का काम रुका हुआ है। हमारे सामने पाला बदलने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था।’’

अब 17 सीटों वाली कांग्रेस के पास सदन में सिर्फ पांच सीटें बची हैं जिसमे से चार विधायक गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। कांग्रेस के इन दसों विधायकों के इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिए। 2004 दल-बदल कानून के अनुसार अगर किसी दल के दो-तिहाई सदस्य पार्टी छोड़कर दूसरे दल में शामिल होते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। इसलिए इन विधायकों की सदस्यता पर कोई आंच नहीं आएगी। कांग्रेस की इस बगावत के बाद 40 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी का आंकड़ा 27 हो गया है।

इस झटके के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि पार्टी जमीन पर जाने के लिए कमर कस रही है, जनता सब देख रही है। सत्ता के लिए बीजेपी ने जो अनैतिक हथकंडे अपनाए हैं उसकी सजा जनता उन्हें जरुर देगी।

गोवा में कांग्रेस जोड़-तोड़ की राजनीति में बीजेपी के सामने कमजोर साबित हुई और कर्नाटक में डीके शिवकुमार योद्धा की तरह बीजेपी और सत्ता के सामने खड़े हैं। कुल मिलाकर 2019 लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस पस्त और कन्फ्यूज्ड हो गई है।

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