सरकार के दावों को आईना दिखा रही है CM Helpline… 6 महीने में अल्मोड़ा से आईं सैकड़ों शिकायतें

सैकड़ों की संख्या में प्रवासियों ने सूचना के अधिकार के तहत गांवों की विकास योजनाओं को लेकर आरटीआई भी लगाई हैं।

अल्मोड़ा ज़िले में कोरोनाकाल में 55 हजार से अधिक प्रवासी अपने घरों को लौटे हैं। इनमें से कई तो छह महीने बिताने के बाद रोज़गार की तलाश में महानगरों को चले गए हैं लेकिन कुछ अब परदेस में धक्के नहीं खाना चाहते। अल्मोड़ा में बहुत से प्रवासियों ने अपने गांवों में काम करना शुरु किया है तो कई स्वरोज़गार के लिए व्यवसाय, निर्माण भी कर रहे हैं। बहुत से गांवों की तस्वीर बदल लेने के सपने में जुट गए हैं। सरकार लगातार प्रवासियों के लिए सुविधाएं देने, रोज़गार उपलब्ध करवाने जुटाने के दावे तो कर रही है लेकिन सीएम हेल्पलाइन में आई शिकातयतों को देखकर ऐसा लगता नहीं है। पिछले 6 माह में अल्मोड़ा से सीएम हेल्पलाइन में 400 से ज़्यादा शिकायतें की गई हैं।

प्राथमिक स्तर पर नहीं दूर हुईं आधे से ज़्यादा शिकायतें

अल्मोड़ा से प्रवासियों ने गांव में रोज़गार, सड़क, बिजली ,पानी और आवास को लेकर अधिकतर शिकायतें की हैं। गांवों में निर्माण कार्यों के घटिया स्तर और गलत तरीके से प्रमाण पत्र दिए जाने की शिकायतें भी सीएम पोर्टल में की गई हैं। प्राथमिक स्तर पर 400 से अधिक शिकायते थीं लेकिन करीब आधी का निवारण शुरुआती स्तर पर कर दिया गया। ज़िलास्तर पर 04 शिकायतें पहुंची हैं जिनके निवारण के लिए काम किया जा रहा है।

इस बारे में पूछे जाने पर मुख्य विकास अधिकारी मनुज गोयल ने न्यूज़ 18 को बताया कि एल वन अधिकारी विकासखण्ड स्तर के होते हैं, जिन्हें प्राथमिक स्तर पर शिकायत का निवारण करना होता है। सीडीओ गोयल मानते हैं कि आधे से ज़्यादा शिकायतों का प्राथमिक स्तर पर निवारण नहीं हुआ और 204 शिकायतें ज़िलास्तर तक पहुंची हैं।

RTI से भी सुधार की कोशिशें  

गोयल बताते हैं कि 193 शिकायतों का निवारण ज़िला स्तर से किया गया है और 11 शिकायतों का अभी निवारण नहीं हो सका है। इस पर शिकायतकर्ता से बात कर उन्हें संतुष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।

अल्मोड़ा ज़िले में ही नहीं राज्य के पूरे पर्वतीय जिलों में पिछले 6 माह में सैकड़ों की संख्या में शिकायतें दर्ज की गई हैं। सैकड़ों की संख्या में प्रवासियों ने सूचना के अधिकार के तहत गांवों की विकास योजनाओं को लेकर आरटीआई भी लगाई हैं। माना जा रहा है कि इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

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