हाईकोर्ट जज के खिलाफ सीबीआई को भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने की अनुमति

नई दिल्ली। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीटिंग जज एसएन शुक्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत मामला दर्ज करने की अनुमति दे दी है। चीफ जस्टिस ने यह फैसला मेडिकल दाखिला घोटाले में जज एसएन शुक्ला के शामिल होने के प्रमाण मिलने के बाद लिया है। इससे पहले चीफ जस्टिस ने प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर इस मामले में संसद में कार्रवाई करने के लिए कहा था।

बता दें कि जस्टिस शुक्ला पर यह आरोप है कि उन्होंने एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले पर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों का पक्ष लिया और मेडिकल कॉलेजों में नामांकन की तारीख बढ़ाकर उनकी मदद की है। 1991 में वीरास्वामी केस में किसी भी जांच एजेंसी को सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में कार्यरत किसी भी जज के खिलाफ साक्ष्य सीजेआई को दिखाए बिना जांच शुरु करने के लिए एफआइआर दर्ज करने की अनुमति नहीं दी गई थी। 1991 से पहले किसी भी एजेंसी ने किसी भी मामले में हाईकोर्ट में कार्यरत किसी भी जज के खिलाफ मामले में जांच नहीं की थी।

उसके बाद से यह पहली बार है जब किसी जांच एजेंसी सिटिंग जज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी गई है। अब सीबीआई जस्टिस शुक्ला के खिलाफ केस दर्ज करेगी और भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता हैं। इस मामले पर पहले पूर्व चीफ जस्टीस दीपक मिश्रा ने भी सिफारिश की थी कि एक आंतरिक समिति ने जस्टिस शुक्ला को गंभीर न्यायिक कदाचार का दोषी माना था।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई ने प्रसाद इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में मेडिकल एडमिशन घोटाले को लेकर उड़ीसा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज आईएम कुद्दूसी, प्रसाद एजुकेशनल ट्रस्ट के मालिक बीपी यादव, पलाश यादव व बिचैलिए विश्वनाथ अग्रवाल, भावना पांडेय समेत मेरठ के एक मेडिकल कॉलेज के सुधीर गिरी और अन्य अज्ञात सरकारी व निजी संस्थान से जुड़े लोगों पर केस दर्ज किया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी 46 मेडिकल कॉलेजों पर अनियमिताओं के चलते अगले एक दो साल तक छात्रों के प्रवेश पर रोक लगाई थी।

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