एनएच 74 घोटाले में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र का ऐतिहासिक फैसला

एनएच 74 घोटाले के प्रति अपना रुख स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ऐतिहासिक फैसला लिया और सबको चकित करते हुए एनएच 74 घोटाले में सामिल दो आईएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। इस फैसले से मुख्यमंत्री ने दिखा दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके क्या इरादे हैं। जब इस घोटाले का खुलासा तत्कालीन कुमायूं कमिश्नर सेंथिल पांडियन ने किया था तो उस वक़्त बताया जा रहा था की यह घोटाला 300 करोड़ का है लेकिन एसआईटी जांच में अब तक यह घोटाला 500 करोड़ का आंकड़ा पार कर चूका है और समय के साथ-साथ अपने रंग बदल रहा है। इस मामले में दोनों आईएएस अधिकारीयों को बचाने के लिए सूबे की नौकरशाही का लम्बे समय से जबरजस्त दबाव था, लेकिन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सभी दबावों को दरकिनार कर जीरो टॉलरेंस की अपनी नीति को जारी रखा। मुख्यमंत्री ने इस मामले में किसी की नहीं सुनी और अपनी नीति सबको स्पष्ट कर दी कि किसी को भी बक्शा नहीं जायेगा। त्रिवेन्द्र के ऐसे रवैये से उनकी कुर्सी के पीछे पड़े समूह में काफी खलबली देखी जा रही है, हर कोई जुगत में है कि कैसे कुर्सी खिंची जाये।

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