ब्रेकिंग न्यूज़, अगले मानसून सत्र में इस स्थान को वर्षाकालीन राजधानी घोषित कर सकती है सरकार

जैसे ही मीडिया के माध्यम से पता चला कि शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन राजधानी बन गयी है, लेकिन वर्षा काल के लिए कोई राजधानी नही बनी है। इसी के साथ राज्य में ठोस नीति निर्धारित नही होने से पूरे प्रदेश के मेढक मुखर हो गये है। उन्होनें मानसून सत्र से पहले अपने लिए वर्षाकालीन राजधानी घोषित करने के लिए बिलों से निकलकर टर्राटराना शुरू कर दिया है। अभी उनके मौसम विभाग ने यह घोषणा भी नहीं कि कब मानसून यहॉ पहुॅचेगा लेकिन मेढक अपनी अपनी नदी नालों से टरटराते हुए उछलते कूदलने लगे हैं। एक दिन बड़ी बरसात हुई और पूरे प्रदेश की बड़ी नदियों के सभी मेढक इकठ्ठे होकर उन्होनें आपातकालीन बैठक बुलायी और कहा कि जब सर्दियों में हम मैदान में रहेगें, गर्मियों में हम पहाड़ चढेगें, लेकिन जब हमारा पीक सीजन होता है, जब हम हर्षोल्लास के साथ नाचते कूदते हैं, तब के लिए एक वर्षाकालीन राजधानी बनायी जानी जरूरी है। इस हेतु मेढक समाज ने अपने प्रदेश के मुखिया से सम्पर्क कर एक आपातकालीन बैठक बुलाने हेतु सुझाव दिया।

कुमांऊ मण्डल के काली और शारदा नदी के मेढक, शारदा, कोसी, एंव छोटी बड़ी नदी नालों के मेढक कूदते फॉदते नैनीताल झील में पहॅुचे और वहॉ कुमाऊं मण्डल की एक बैठक रखी गयी। वहीं गढवाल मंडल से नयार, अलकनंदा टौंस, भागीरथी नदी के सब मेढक गंगा नदी में स्नान करते हुए हरिद्वार पहुॅचे सबने हर की पैड़ी में डुबकी लगाकर पहले अपना कीचड़ साफ किया और उसके बाद हर हर गंगा कहते हुए आलीशान कुंऐ में जाकर वर्षाकालीन राजधानी हेतु चर्चा शुरू की।

दोनो मण्डलों से प्रतिनिधि चुने गये और सबने मिलकर ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के किनारे पुनः प्रस्ताव पर चर्चा की और एक संयुक्त ज्ञापन प्रदेश के मुखिया को भेजते हुए अपने लिए वर्षाकालीन राजधानी की मॉेग की। मेढकों ने अपने ज्ञापन में कुछ इस तरह अपनी बात रखी।

माननीय मुखिया साहब, आपने दो राजधानी तो हमारे लिए बना दी है, एक शीतकालीन और एक ग्रीष्मकालीन जिसका हम उछलते उछलते और टर्राते टर्राते आपका धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। शीतकालीन राजधानी तो आपने लंदन की तरह और ग्रीष्मकालीन को पेरिस की तरह विकसित कर दिया है। मान्यवर जैसा कि आप जानते हैं कि हमारा पीक सीजन 15 जून से 15 अक्टूबर तक होता है, ग्रीष्मकाल और शीतकाल में हम पाताल लोक में अपनी राजधानी में चले जाते हैं, वहॉ की पाताल देवी ने हमे सब सुविधाओं से लैस किया हुआ है, उस समय हम वहॉ पूरे ऐशो आराम से दिन व्यतीत करते हैं, क्योंकि दोनो समय में हमारा विपक्ष संपेरा समाज भी आराम से बिलों में रहता हैं, तब हमे इतनी चितां नहीं रहती हैं, लेकिन जैसे ही बरसात में बादल उमड़ने घूमड़ने लगते हैं, मोरनी के नाचने की थाप हमें सुनायी देती है, किसानों द्वारा खेतों में हल लगाने की आवाज और बैलों के गले मे बंधी घण्टियों की आवाज हमें सुनायी देती हैं, बरसाती गोबर की खुशबू और जुगनू की सुमधुर संगीत और उनका टीमटीमता प्रकाश और हल्की भीगी मिट्टी की सुगंध हमें पाताल लोक से भूलोक में आने के लिए निमत्रंण दे देती हैं, उसी समय हमारा विपक्ष सपौंला भी चुनावों के बिगुल बजने की तरह बाहर निकल आते हैं, ऐसे में हमें बरसात में सुरक्षा को देखते हुए उचित नदी या स्थान की नितांत आवश्यकता है, क्योंकि हमारा मेढक समाज का अस्तिव समाप्ति की ओर है। ऐसे में हमारे लिए हमारे सीजन के लिए राजधानी घोषित की जाय और वाशिंगटन के तर्ज पर उसका विकास मॉडल हो, नहीं तो चंडीगढ़ जैसे तो बननी जरूरी है।हमें ऐसा स्थान चाहिए जहॉ कोई विकास नहीं हुआ हो, ताकि वहॉ वर्षाकालीन राजधानी बनने से वहॉ पर हमारे उच्च वर्गीय बडे मेढकों की वीआईपी मूवमेंट होने से हमारे लिए आलीशान कुंए, तालाब, नदीयों की सफाई होगी, हम सब लोग रिमझिम होती बरसात में मस्त मगन होकर उछलते कूदते, और अपनी धून में अपना राग गा सकें। क्योंकि ये चार महीने ही तो हमारे हैं, बाकि तो हमने पाताल लोक में चले जाना है। इसके साथ उसे ई कैपीटल बनाना, ताकि कम ही संसाधनों की आवश्यकता हो।

मेढको के इस ज्ञापन पर सरकार ने विचार विमर्श किया और मेढकों के नेता को बुलाकर यह सुझाव मॉगा कि आपके हिसाब से किस जगह को वर्षाकालीन राजधानी घोषित किया जाय। मेढक के मुखिया ने पुनः सभी मेढकों की आपातकालीन बैठक आहुत कर स्थल चयन हेतु मण्डलों और आम कार्यकर्ताओं से सुझाव व्हाटस अप और सोशल मीडिया से मंगवाने हेतु कह दिया है। सभी से कहा गया है कि वर्षाकालीन राजधानी ऐसे स्थल पर बनायी जाय जो मैदान भी न हो और पहाड़ भी नहीं, नदी भी हो और उसमें पानी नहीं, राजधानी के नजदीक हो, लेकिन सबसे पिछड़ा हुआ इलाका हो, जहॉ बरसात मे चार महीनों में सड़क नहीं होने से वह अन्य क्षेत्रों से कट जाय, जहॉ न स्कूल हो, न अस्पताल हो, और न ही दुकानें हो, ऐसे निर्जन स्थल को वर्षाकालीन राजधानी बनाये जाने हेतु सर्वे करने हेतु कहा गया है, ताकि इसका चरणबद्ध विकास हो सके।

सभी जगह से रिपोर्ट आयी सर्वे किया गया तो एक उपयुक्त स्थल जो इन सब शर्तों को पूरा करता था सर्वसम्मति से सरकार की आगामी मानसून सत्र में राजधानी घोषणा हेतु नाम भेज दिया गया है। यह निर्जन स्थल पौड़ी जिला का यमकेश्वर क्षेत्र की विहंगम तालघाटी जो इन सभी शर्तो को पूर्ण कर रही थी, इस संबंध में सरकार से जल्दी ही घोषणा होने के पूरी उम्मीद है कि यह वर्षाकालीन राजधानी घोषित हो सकती है, सभी गणमान्य, मीडिया, एवं सरकारी तंत्र तालघाटी के भ्रमण पर जाने की योजना पर कार्य कर रहे है। अब देखना होगा कि क्या मेढकों के लिए तालघाटी वर्षाकालीन राजधानी चयन योग्य हो पाती है, या यह भी किसी की आपत्ति लगकर किसी और जगह की घोषणा होती है, यह आने वाला मानसून सत्र ही बतायेगा।

नोटः इसका वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है, यह केवल लेखक का काल्पनिक व्यंग्य मात्र है।

हरीश कण्डवाल मनखी की कलम से।

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