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देशभक्ति के पटाखे और जश्न का टशन
 

सहीराम

सौ करोड़ टीके लगाने का जश्न दोबारा न हो पाया! अगर हमारी क्रिकेट टीम पाकिस्तान से मैच जीत जाती तो अंदाजा लगाइए कि कैसा रंग जमता। पटाखों पर चाहे कितना ही प्रतिबंध लगा होता, उनके फोडऩे से चाहे कितना ही प्रदूषण फैलता, फिर भी पटाखे अवश्य फूटते। वैसे भी पटाखे फोडऩा हमारे यहां अब देशभक्ति में शुमार होने लगा है। गलती से कोई नेता अगर पटाखे न फोडऩे का उपदेश दे दे तो उसकी शामत आ जाती है। उसे धर्मविरोधी तो करार दे ही दिया जाता है, देशद्रोही भी ठहरा दिया जाता है। बेचारे आमिर खान ने तो पटाखे न फोडऩे का एक विज्ञापन ही किया था कि देशभक्त उस कंपनी के मालिक तक शिकायत ले जाने से नहीं चूके।

तो प्रदूषण वगैरह के बावजूद पटाखे फोडऩा देशभक्ति का काम हो चुका है। इसलिए अगर हमारी क्रिकेट टीम जीत जाती तो पटाखे अवश्य ही फूटते। वे कम से कम इसलिए तो जरूर ही फोड़े जाते कि उनकी गूंज पाकिस्तान तक सुनायी दे। अभी तो आतंकवादियों की बंदूकों की आवाज ही वहां तक पहुंच रही है। अगर यह मैच जीत जाते कम से कम पटाखों की आवाज भी वहां तक पहुंच जाती। हिसाब बराबर मान लिया जाता। हमारे यहां पाकिस्तान तक आवाज पहुंचाने की बड़ी ललक रहती है। हमारे नेता तो चुनावी जीत की धमक भी वहां तक पहुंचाने के अरमान पाले रहते हैं।

खैर, हमारी टीम भले ही किसी से भी हार जाती। चाहे टिंबकटू से ही हार जाती। क्या हारते नहीं? वो तो भला हो एथलीटों का कि वे अब ओलंपिक में पदक लाने लगे हैं, वरना तो पहले हर खेल में हार ही हमारे हिस्से आती थी। पर क्रिकेट की हार की और बात है। सुना है कभी पहले पाकिस्तान के साथ हॉकी भी ऐसे ही खेली जाती थी। पाकिस्तान के साथ खेलना, हमारे यहां खेल नहीं माना जाता, युद्ध माना जाता है।
इस मामले में खेल भावना को कोई तवज्जो नहीं देता। खेल भावना गई तेल लेने! बताओ तुम हारे कैसे? फिर अब तो खैर ट्रोल आर्मी होने लगी है।

सोशल मीडिया ने और चाहे कुछ न दिया हो, पर गालियों के खजाने की चाबी ट्रोल सेना को जरूर दे दी है। लेकिन जब सोशल मीडिया नहीं होता था, तब भी तोहमत तो मोहम्मद शमी जैसों को ही झेलनी पड़ती थी।
तो जनाब हमारी क्रिकेट कम से कम देश में सौ करोड़ टीके लगने का जो जश्न मनाया जा रहा है, उसे दुगना करने के लिए ही जीत जाती। वैसे भी कितने साल बाद तो मैच हुआ था। आगे होता रहे, इसीलिए जीत जाना चाहिए था। अब तो पता नहीं कब पाकिस्तान से खेलना बंद हो जाए। अगर टीम जीत जाती तो हो सकता है उसे प्रधानमंत्री के साथ डिनर करने या चाय पार्टी करने का ही मौका मिल जाता।