उत्तराखंडः केदारनाथ आपदा के 7 साल बाद 70 लोग 7 दिन करेंगे 3200 लापता की ‘खोज’

2013 की आपदा के बाद पुलिस अब तक कुल 699 कंकाल बरामद कर चुकी है। जबकि एक बार लापता लोगों की खोज में अभियान चलाया जा रहा है।

देहरादून। बारिश के दौरान हर साल ही उत्तराखंड में गदेरों, बरसाती नदियों के उफ़ान में आने की वजह से जान-माल का नुकसान होता है। लेकिन साल 2013 की केदारनाथ आपदा उत्तराखंड में आई सबसे बड़ी आपदा थी। पानी और उसके साथ आए मलबे की चपेट में आकर साढ़े पांच हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी करीब 3900 से लापता थे। इनकी तलाश के लिए कई बार अभियान चलाए गए हैं और अभी तक 699 कंकाल बरामद किए गए हैं। अब भी 3200 लोग लापता हैं और हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक बार फिर इनकी तलाश के लिए अभियान शुरू किया जा रहा है ताकि उनके परिजनों को पता चल सके कि वह जिंदा हैं या मारे जा चुके हैं।

हर साल चलता है खोज अभियान 

2013 की आपदा के बाद केदार घाटी में लापता लोगों की तलाशी के लिए कई बार अभियान चले हैं। 2013 में ऐसे ही अभियान में 545 कंकाल मिले थे। साल 2014 में 63, 2015 में 3, 2016 में 60, 2017 में 7 और 2018 में 21 कंकाल बरामद हुए। 2013 की आपदा के बाद पुलिस अब तक कुल 699 कंकाल बरामद कर चुकी है।

साल 2013 में आई आपदा के दौरान पुलिस ने 1840 मुकदमे केस दर्ज किए थे जिनके अनुसार करीब 3900 लोग लापता थे। 2013 से अब तक चलाए गए अभियान में 699 कंकाल मिले हैं और अब भी 3200 लापता हैं। इनकी तलाश के लिए एक बार फिर रुद्रप्रयाग पुलिस 7 दिन का अभियान शुरु करने जा रही है।

2013 से हर साल लापता लोगों की तलाश के लिए खोज अभियान चलाया जाता है। (फ़ाइल फ़ोटो)

70 लोगों की 10 खोज टीमें 

आईजी गढ़वाल अभिनव कुमार के अनुसार केदारनाथ पहुंचने के अलग-अलग रास्तों में है अभियान चलेगा जिसके लिए 70 लोगों की 10 टीमें गठित की गई हैं।  यह टीमें केदारनाथ वासुकी ताल केदारनाथ चौराहा बाड़ी त्रिजुगीनारायण श्री गरुड़ चट्टी होते हुए केदारनाथ, कालीमठ, चौमासी खान, केदारनाथ, जंगल चट्टी और रामबाड़ा के ऊपरी क्षेत्रों में कैंप लगाकर 7 दिन तक खोज करेंगी।

इन टीमों में स्थानीय लोगों के साथ एसडीआरफ, पुलिस और मजदूरों के साथ फार्मेसिस्ट भी रहेंगे। खोजबीन के बाद अगर इस टीम को कोई लाश या कंकाल मिलता है तो उसका डीएनए लेने के बाद उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शुरुआती दौर में 7 दिन तक यह अभियान चलेगा हालांकि आगे भी ज़रूरत पड़ेगी तो खोज अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान की वीडियोग्राफी भी करवाई जाएगी।

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