64 प्रतिशत व्यायाम ना करने वाले दिल्लीवासियों को हृदय का जोखिम सबसे अधिक

– देब्दुलाल पहाड़ी – 

इस विश्व हृदय दिवस पर, सफोलालाइफ ने अपने प्रमुख अध्ययन के माध्यम से आमतौर पर नजरअंदाज की जाने वाली जीवनशैली से संबंधित आदतों के बारे में बताया है। इसमें बताया गया है कि कैसे इन लाइफस्‍टाइल आदतों का उच्‍च संबंध हृदय स्‍वास्‍थ्‍य जोखिम से है। सबसे ज्‍यादा चौंकाने वाली बात है हृदय के स्‍वास्‍थ्‍य पर इन आदतों से पड़ने वाले प्रभाव को लेकर जागरुकता का अभाव। इस अध्ययन में सामने आई एक प्रमुख बात यह है कि दिल्ली में रहने वाले 64 प्रतिशत लोगों में हृदय का जोखिम अधिक है जोकि नींद की कमी, तनाव, सुस्‍त जीवनशैली, भोजन न करना और बेली फैट (पेट के पास जमा चर्बी) जैसे एक या अधिक बिहेव्यिर को प्रदर्शित करते हैं। भारत स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो रहा है, लेकिन हृदय के स्वास्थ्य पर जागरूकता अब भी कम है। हमारे जीवन की छोटी-छोटी आदतें, जिन पर हम ध्यान नहीं देते हैं, चुपचाप हमारे हृदय के लिये जोखिम बढ़ाती रहती हैं।

हालांकि, हमें उच्‍च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि जैसे मार्कर्स के बारे में जानकारी है लेकिन हम अक्‍सर छोटी-छोटी दिखने वाले लाइफस्‍टाइल आदतों से पड़ने वाले असर को लेकर जागरुक नहीं हैं जोकि हमारे नियंत्रण में होती हैं। इन आदतों के प्रभाव को समझकर हम हृदय के स्वास्थ्य पर जागरूकता एवं देखभाल को बेहतर बना सकते हैं। इसलिये, हृदय को खतरा देने वाली जीवनशैली की इन आदतों पर अधिक जागरूकता उत्पन्न करने के लिये सफोलालाइफ ने एक सर्वे का आयोजन किया जिसे नील्‍सन द्वारा संचालित किया गया। इसमें दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद के प्रमुख शहरों में 1226 लोगों से प्रतिक्रिया ली गई। इस अध्ययन में कुछ चौंकाने वाले तथ्‍य सामने आये जिसमें उन लोगों में हृदय का जोखिम बढ़ने के मामले अधिक पाये गये जोकि तनावग्रस्‍त हैं अथवा अपर्याप्‍त नींद लेते हैं।

 नींद का अभावतनावसुस्‍त जीवनशैलीभोजन नहीं करना और बेली फैट लाइफस्‍टाइल संबंधी प्रमुख आदतें है जो कि उन लोगों में नजर आती हैं जिन्‍हें हृदय का जोखिम है 

 

भौगोलिकता और जनसांख्यिकी के आधार पर भी सफोलालाइफ ने रोचक तथ्य प्रस्तुत किये हैं:

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  • इन तीन शहरों में जीवनशैली की ऐसी एक या अधिक आदतों वाले लोगों में मुंबईकरों को हृदय का जोखिम सबसे अधिक है, जिनके बाद दिल्लीवालों और फिर हैदराबादियों का नंबर आता है।
  • दिल्ली में30-40 वर्ष के 55 प्रतिशत लोग, जो 7.5 घंटे से कम की नींद लेते हैं, उन्हें हृदय का जोखिम है और 41-55 वर्षीय लोगों में यह संख्या 68 प्रतिशत हो जाती है।
  • इन तीन शहरों में30-40 वर्ष के 57 प्रतिशत लोग तनाव और हृदय के जोखिम में हैं और 41-55 वर्षीय लोगों में यह संख्या 71 प्रतिशत हो जाती है।
  • दिल्ली में व्यायाम नहीं करने वाले90 पुरूष और 98 प्रतिशत महिलाएं हृदय के जोखिम में हैं,लेकिन इसे हृदय के जोखिम का कारक नहीं मानते हैं।

इस अध्ययन के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए डॉ. एच.के. चोपड़ा (कार्डियोलॉजिस्ट) ने कहा कि-

 ‘‘हम सभी जानते हैं कि हमारी जीवनशैली हमारे सर्वांगीण स्वास्थ्य को प्रभावित करती है,जिसमें हृदय का स्वास्थ्य भी शामिल है। हम जोखिम के छोटे कारणोंजैसे अपर्याप्त नींद,भोजन से भागनाआदि की अक्सर उपेक्षा करते हैं और इन्हें गंभीरता से नहीं लेते हैं। सफोलालाइफ अध्ययन कहता है कि दिल्ली में नियमित व्यायाम नहीं करने वाले 94 प्रतिशत लोगों को हृदय का जोखिम है और वे इसे हृदय के जोखिम के महत्‍वपूर्ण कारणों में भी नहीं गिनते हैं। आज जीवनशैली की जिन मूलभूत आदतों को हम नजरअंदाज कर रहे हैंवे बड़ी समस्या के रूप में उभर सकती हैं। यह अध्ययन हमें जागने का संकेत दे रहा हैताकि हम हृदय के स्वास्थ्य को गंभीरता से लें और अपना सर्वांगीण स्वास्थ्य सुनिश्चित करें।’’

 हृदय के लिये स्वास्थ्यकर जीवनशैली अपनाने के विषय में पोषण विशेषज्ञ नीलांजना सिंह कहती हैं कि सफोलालाइफ अध्ययन ने हमारी जीवनशैली और हमारे हृदय के स्वास्थ्य पर उसके प्रभाव की बीच सम्बंध पर चौंकाने वाली जानकारी प्रस्तुत की है। हममें से अधिकांश लोग जीवनशैली से सम्बंधित इन छोटी-छोटी आदतों में से एक या अधिक की उपेक्षा करते हैं, जो हमारे हृदय को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं। अपनी नियमित जीवनशैली में छोटे,सकारात्मक बदलाव कर हम अपने हृदय के जोखिम को बहुत हद तक कम कर सकते हैं, जैसे सही भोजन लेना, पर्याप्त नींद लेना, नियमित रूप से व्यायाम करना और मोटापे पर नजर रखना। आज के दौर में, काम करने के व्‍यस्‍त शेड्यूल और सुस्‍त जीवनशैली से भारतीयों के हृदय का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। हृदय के जोखिम को बढ़ाने वाले कई कारक हैं, लेकिन इन छोटे कारकों को जानना जरूरी है और हृदय के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिये जीवनशैली में बदलाव चाहिये। इसलिये, इस वर्ष विश्व हृदय दिवस के अवसर पर, सफोलालाइफ अध्ययन का मकसद हमार हृदय के स्‍वास्‍थ्‍य पर उन छोटी आदतों के प्रभाव पर जागरूकता फैलाना है, जिन्‍हें पहचानने में हम नाकाम रहते हैं।

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