42 साल बाद मिला इंसाफ

Image result for manvadhikar aayog uttarakhandयूपीसीएल में 1977 से रूका हुआ फंड आयोग के दखल देने पर ब्याज सहित मिला। राजीव नगर निवासी नत्थीलाल ने 2016 में आयोग से शिकायत की थी कि वे 1956 में विद्युत आपूर्ति कार्यालय मसूरी में लगे थे लेकिन 1976 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद में इसका विलय हुआ था।

उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वे यूपीसीएल में आ गए लेकिन नत्थीलाल को 1976 तक का 35 हजार रुपये सीपीएफ मिलना था। उन्होंने 1977 में इसके लिए आवेदन किया लेकिन विभाग बदलने की वजह से उनका फंड भी रूक गया था। आयोग में नत्थीलाल केस की कई सुनवाई और आदेशों के बाद यूपीसीएल ने उनका रिकार्ड ना होने की बात कही थी लेकिन आयोग की सख्ती दिखाने पर यूपीसीएल ने उन्हें ब्याज सहित दो लाख रुपये उनके फंड में दे ही दिया।

जस्टिस अखिलेश चंद्र शर्मा, सदस्य राज्य मानवाधिकार आयोग कहते हैं कि इस मामले में आयोग की सख्ती से ही फरियादी को न्याय मिला है। हाल के दिनों में पेंशन और फंड से जुड़े काफी मामले आए हैं उनका निस्तारण भी जल्द ही किया जाएगा। आयोग के पास पहले सिर्फ पुलिसि उत्पीड़न से जुड़े मामले ही आते थे।

बता दें कि मानवाधिकार आयोग में जस्टिस अखिलेश चंद्र शर्मा ही अकेले सदस्य हैं, लेकिन वे रोज 20 से 25 केसों की सुनवाई कर रहे हैं। और उनके पास आने वाले ज्यादातर केसों का दो से तीन दिन में निस्तारण भी कर रहे हैं। उनके इस प्रयास से आयोग में आए केसों की संख्या काफी कम हो गई है।

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