उत्तराखंड सरकार कोचिंग संस्थानों को बंद करने के फैसले पर करे पुनर्विचार, रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे अधिकांश कोचिंग सेंटर

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने कोरोना संकट को देखते हुए सभी कोचिंग संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया है। सरकार के इस आदेश के बाद हजारों कोचिंग सेंटरों के बंद होने की आशंका है। इससे एक ओर जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को नुकसान होगा तो वहीं कई संस्थानों के मालिक और वहां काम करने वाले सड़क पर आ जाएंगे। कोचिंग सेंटर संचालकों का कहना है कि बाजार और सिनेमा हाॅल की तर्ज पर उनको भी आधी क्षमता के अनुसार काम करने दिया जाए।

प्रदेश में सबसे अधिक मार आर्थिक मार कोचिंग सेंटरों पर पड़ रही है। कोचिंग संचालकों का कहना है कि कोरोना काल में सबसे पहले कोचिंग सेंटरों को बंद कर दिया गया जबकि कोचिंग सेंटर सबसे बाद में खोले गये थे। कोचिंग सेंटरों में पहले ही कोरोना के कारण बहुत कम छात्र आ रहे हैं और यदि इनको बंद कर दिया गया तो हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट हो गया है।

कोचिंग संचालकों ने सरकार से मांग की है कि वो अपने इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए ताकि हजारों लोगों को बेरोजगार होने से बचाया जा सके। कई छोटे कोचिंग संस्थान इस फैसले से बुरी तरह से प्रभावित होंगे।

कोचिंग संस्थान से जुड़े ड्रीम्स संस्था के सचिव दीपक नौटियाल ने कहा कोचिंग सेंटरों को बंद करने का फैसला समझ से परे है। यह कौन सा तर्क है कि इस संकट की घड़ी में जहाँ लाखों करोड़ों लोगों का हुज़ूम मेला संस्कृति निभाने पर लगा है उसके लिए कोई नियम नहीं। इलेक्शन का माहौल बात बात पर डराता है वहां कोई नियम नहीं और वो कोचिंग सेंटर्स जहाँ कुछ बच्चे पढ़ने आते हैं और नियमों का पूरा पालन करते हैं, उन्हें बंद किया जाय। तो अफ़सोस होता है कि यूँ ही जानवरों की तरह हंकते रहेंगे सब और विरोध भी नहीं होगा। और यह तो इस बीते समय में देखा गया है एक अदभुत अनुभव भी लिया गया है कि जितना नियम बच्चे व अन्य विद्यार्थी पालन कर रहे थे उतना कोई भी नहीं कर रहा था। अगर कुछ फ़िल्टर कर हर तरफ एक जैसा नियम बनाया जाता तो ठीक रहता। कुछ तो चलती रहती उनकी दिनचर्या।

कोचिंग संस्थान से जुड़े ड्रीम्स संस्था के सचिव दीपक नौटियाल कहते हैं कि अब सवाल ये उठता है कि अब उनके लिए आप के पास क्या योजना है ? शायद इसका जबाब सरकार देखना तक नहीं चाहेगी। अगर सब कुछ बंद होता तो तब भी एक कोरोना को रोकने का लॉजिक बनता है मगर एक्सट्रीम मास को दरकिनार कर केवल उनके लिए नियम जो संयमित रहते है नियमों का पालन करते हैँ और सबसे बड़ी बात सरकारों की तैयार की हुई बेरोजगारी की फसलों की रफ़्तार को कम करने का काम करते हैं स्वरोजगार को बढ़ावा देते हैं। हम इस देश के जिम्मेदार नागरिक हैं जो भी नियम बनेगा सभी को उसका पालन करना होगा मगर एक विरोध उस फैसले का जो तर्क संगत नहीं लगता।

कोचिंग संस्थान से जुड़े ड्रीम्स संस्था के सचिव दीपक नौटियाल ने कहा कि हम सब कोचिंग संस्थान संचालक आपके माध्यम से सरकार से एक अपील कि सरकार पुनः विचार करते हुए उन क्षेत्रों में भी जिन्हें पूर्ण रूप से बंद कर दिया है 50 प्रतिशत उपस्थिति पर संचालित होने देने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करे।

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