उत्तराखंडः सरकारी ज़मीन पर बिना नक्शा पास हुए बिल्डिंग खड़ी की है बीजेपी नेता से रंगदारी मांगने वाले ठेकेदार ने

इस मामले के सुर्खियों में आने के बाद पिथौरागढ़ प्रशासन ने बिल्डिंग सीज़ कर दी है और जांच की बात कही है।

पिथौरागढ़। भाजपा ज़िला उपाध्यक्ष गोविंद महर पर रंगदारी के मामले में नया मोड़ आ गया है। शिकायत करने वाला ठेकेदार भी इस प्रकरण में बड़े सवालों के घेरे में हैं। असल में शिकायतकर्ता ठेकेदार ने सरकारी ज़मीन पर अवैध निर्माण किया है। खुलेआम सरकारी तंत्र की नाक के नीचे हो रहे अवैध निर्माण ने ज़िला विकास प्राधिकरण की पोल भी खोल दी है। अब ज़िला प्रशासन कह रहा है कि मामले की जांच की जा रही है और अगर इमारत अवैध हुई तो उसे तोड़ दिया जाएगा।

ठेंगे पर नियम-कानून 

बीजेपी जिला उपाध्यक्ष गोपू महर पर रंगदारी का आरोप अवैध निर्माण की पोल खोल देगा यह शायद ही किसी ने सोचा था। असल में बिहार के ठेकेदार बांकेलाल चौधरी ने कायदे कानूनों को ठेंगा दिखाकर एक बिल्डिंग खड़ी कर दी है। जिस जमीन पर यह बिल्डिंग तैयार हो रही है, उसमें अधिकांश हिस्सा सरकारी है लेकिन दंबगई पर उतरे ठेकेदार को इसकी रत्ती भर भी परवाह नहीं है।

आलम यह है कि बिना प्लान पास हुए ही बीते दिनों छुट्टियों में रात को ही लेंटर डाल दिया गया। यह सब कुछ ज़िला विकास प्राधिकरण की नाक के नीचे होता रहा, लेकिन रोकने वाला कोई नहीं था। अब मामले के तूल पकड़ने के बाद अवैध तरीके से बन रही बिल्डिंग सीज़ की गई है।पिथौरागढ़ के ज़िलाधिकारी विजय जोगदांडे का कहना है कि ठेकेदार से ज़रूरी कागज़ात मांगे गए हैं। अगर निर्माण पूरी तरह नियमों के खिलाफ हुआ तो बिल्डिंग तोड़ दी जाएगी।

DDA की कोई ज़िम्मेदारी नहीं?

मामला हाई प्रोफाइल होने के बाद अब भले ही प्रशासन ने बिल्डिंग सीज़ कर दी हो लेकिन सवाल ये है कि लैंटर डालने तक विकास प्राधिकरण आखिर सोया कहां था। दरअसल इस ठेकेदार पर पहले भी अवैध निर्माण के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में ये मामला रंगदारी से शुरु होकर अवैध निर्माण तक जा पहुंचा है। यह भी सच है कि भाजपा नेता की शिकायत के बाद ही सरकारी तंत्र ने ठेकेदार पर लगाम कसी है।

ठेकेदार बांकेलाल चौधरी का कहना है कि उसने सरकारी ज़मीन को छोड़कर निर्माण किया है। बिना प्लान पास हुए निर्माण के सवाल पर ठेकेदार का कहना है कि प्लान पास करने के लिए उसने जमा किया हुआ है। वहीं भाजपा ज़िला उपाध्यक्ष गोविंद महर का कहना है कि जब उन्होंने अवैध निर्माण की शिकायत की तो ठेकेदार ने उन पर रंगदारी का झूठा आरोप लगा दिया।

बेतरतीब निर्माण को रोकने के लिए पहाड़ी शहरों को ज़िला विकास प्राधिकरण में तब्दील किया है। बावजूद इसके न तो अवैध निर्माण रुक रहे हैं और न ही प्लान के मुताबिक निर्माण हो रहा है। ऐसे में डीडीए यानी जिला विकास प्राधिकरण की भूमिका सबसे अधिक सवालों में है।

 

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